यूपी समेत कई राज्यों में वक्त से पहले विधानसभा चुनाव की आहट।

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।

दयाशंकर त्रिपाठी 

 

उत्तर प्रदेश और अगले वर्ष विधानसभा चुनाव वाले अन्य राज्यों में चुनाव तय समय से पहले हो सकते हैं। इसकी संभावनाओं को लेकर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों का कहना है कि आगामी जनगणना और उससे जुड़ी प्रशासनिक तैयारियों के कारण सरकारी मशीनरी पर बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

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हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में भी चुनावी कार्यक्रम और जनगणना संबंधी गतिविधियों के बीच तालमेल को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा चल रही है।

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माना जा रहा है कि यदि दोनों प्रक्रियाएं एक ही समयावधि में संचालित होती हैं तो अधिकारियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिलाधिकारी स्तर से लेकर निचले स्तर तक बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी चुनाव और जनगणना दोनों प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जनगणना के दौरान जिला प्रशासन को व्यापक स्तर पर संसाधन और मानवबल जुटाना पड़ता है, जबकि चुनाव के समय भी यही मशीनरी निर्वाचन प्रक्रिया का संचालन करती है।

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सूत्रों के मुताबिक, इसी वजह से दोनों कार्यक्रमों के संभावित टकराव को देखते हुए प्रशासनिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस विषय पर अभी तक चुनाव आयोग या गृह मंत्रालय की ओर से कोई औपचारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

समय से पहले चुनाव की चर्चाओं ने राजनीतिक दलों की गतिविधियों को भी तेज कर दिया है। भाजपा जहां पहले से संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रही है, वहीं विपक्षी दल भी संभावित चुनावी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही अभी कोई आधिकारिक घोषणा न हुई हो, लेकिन चुनाव पूर्व तैयारियों के लिहाज से सभी दल सतर्क नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग फिलहाल विभिन्न राज्यों की परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं का अध्ययन कर रहा है।

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