जुलाई माह के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान का शुभारंभ, जन-जागरूकता रैली को दिखाई गई हरी झंडी।

संचारी रोगों की रोकथाम एवं आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जुलाई माह में चलाए जाने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (द्वितीय चरण) का शुभारंभ बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर से किया गया।

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स्वतंत्र प्रभात ।
 
प्रयागराज। 
 
संचारी रोगों की रोकथाम एवं आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से जुलाई माह में चलाए जाने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान (द्वितीय चरण) का शुभारंभ बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर से किया गया। अभियान का उद्घाटन अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. राजेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. आशु पाण्डेय तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने संयुक्त रूप से जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर किया।
 
इस अवसर पर अधिकारियों ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का संचालन 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक किया जाएगा, जबकि दस्तक अभियान 11 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलेगा। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में संचारी रोगों की रोकथाम, साफ-सफाई, मच्छरजनित रोगों की रोकथाम तथा जन-जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
 
कार्यक्रम का संचालन जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अंशु ने किया। इस दौरान अपर निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
 
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि दस्तक अभियान के अंतर्गत स्टॉप डायरिया अभियान भी संचालित किया जाएगा, जिसमें आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां घर-घर जाकर डायरिया से प्रभावित परिवारों को ओआरएस, जिंक की गोलियां तथा क्लोरीन की गोलियों का वितरण करेंगी। साथ ही स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल और व्यक्तिगत साफ-सफाई के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा।
 
संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. के.के. मिश्रा ने कहा कि जनपद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के अतिसंवेदनशील इलाकों में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, ताकि मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, डायरिया सहित अन्य संचारी रोगों की प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित की जा सके।
 
 
 

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