सितारगंज उत्तरी बहुउद्देशीय सोसाइटी में पतंजलि ने दिखाई

सितारगंज उत्तरी बहुउद्देशीय सोसाइटी में बुधवार, 28 अक्टूबर को पतंजलि की टीम द्वारा ‘धरती का डॉक्टर’ मिट्टी जांच मशीन का डेमो प्रस्तुत किया गया।

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सितारगंज। सितारगंज उत्तरी बहुउद्देशीय सोसाइटी में बुधवार, 28 अक्टूबर को पतंजलि की टीम द्वारा ‘धरती का डॉक्टर’ मिट्टी जांच मशीन का डेमो प्रस्तुत किया गया। इस दौरान क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, विभिन्न सहकारी समितियों के पदाधिकारियों, कृषि सखियों और बड़ी संख्या में किसानों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की जांच के महत्व, इसके लाभ और खेती में इसके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
 
पतंजलि की टीम ने मिट्टी जांच मशीन का प्रदर्शन करते हुए बताया कि मिट्टी की जांच के माध्यम से उसकी गुणवत्ता और पोषक तत्वों की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलती है। मिट्टी की जांच के आधार पर किसान अपनी फसलों की जरूरत के अनुसार खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल करने की बेहतर योजना बना सकते हैं। इससे अनावश्यक उर्वरकों के प्रयोग को कम करने, खेती की लागत नियंत्रित करने और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
 
कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने मिट्टी की जांच से होने वाले फायदों को ध्यानपूर्वक सुना और इस तकनीक के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस दौरान आधुनिक तकनीक को कृषि से जोड़ने और किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया गया। उपस्थित किसानों ने मिट्टी की गुणवत्ता की जानकारी को खेती के लिए उपयोगी बताया।
 
इस अवसर पर सचिव शिवम त्यागी, सचिव अरविंद सिंधु, सचिव सरोज प्रकाश कौर, सिसौना से सुमित वर्मा, सचिव रुस्तम सिंह, बषघर से भूपेंद्र सिंह, दक्षिणी सोसाइटी के अध्यक्ष सौरभ अरोड़ा, जिला पंचायत सदस्य सूरज नारायण, सोसाइटी अध्यक्ष राम भरोसे राणा तथा भारतीय जनता पार्टी ओबीसी मोर्चा के मंडल अध्यक्ष संदीप बाबा उपस्थित रहे।
 
वहीं, पतंजलि की ओर से डॉ. आशुतोष गुप्ता, हसमुद्दीन आलम और आयुष राजपूत ने मशीन का प्रदर्शन किया और किसानों को इसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में कृषि सखियों ललिता राणा, शालिनी, पवित्रा राणा, गीता शर्मा और रिंकी राणा ने भी प्रतिभाग किया।
 
किसान सुरेश राणा सहित क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की जांच के प्रति जागरूक करना और उन्हें वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। मिट्टी की जांच को खेती की बेहतर योजना बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए किसानों को उपलब्ध तकनीकों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया।

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