कोटवा में तालाब के नवीनीकरण पर सवाल एक वाटर रैंप ढहा दो क्षतिग्रस्त

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स्वतंत्र प्रभात।
 
 ब्यूरो प्रयागराज 
 
 बहादुरपुर विकासखंड की कोटवा ग्रामसभा में चुम्मन के तालाब के नवीनीकरण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाता संख्या 1156 में दर्ज तालाब पर वर्ष 2025-26 के बजट के दौरान लघु सिंचाई विभाग की ओर से कराए गए कार्य में बनाए गए तीन वाटर रैंपों में से एक ढह चुका है दूसरा क्षतिग्रस्त है और तीसरे की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब नायब तहसीलदार की रिपोर्ट में रैंप टूटने का उल्लेख पहले से दर्ज है तो विभाग के अधिशासी अभियंता रामेश्वर सिंह ने बातचीत में इसकी जानकारी नहीं होने की बात क्यों कही रिपोर्ट और विभागीय अधिकारी के बयान के बीच सामने आया यह अंतर अब जांच और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
 
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तालाब के नवीनीकरण में संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत से निर्माण मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि यदि काम गुणवत्ता के निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया होता तो रैंपों की ऐसी स्थिति नहीं होती। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
 
रिपोर्ट में रैंप टूटने का उल्लेख फिर विभाग को जानकारी क्यों नहीं।
 
मामले में उपलब्ध नायब तहसीलदार की हस्तलिखित रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज है। रिपोर्ट के अनुसार, 24 मई 2026 को तालाब का सीमांकन कराया गया था। इसमें लघु सिंचाई विभाग की वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन योजना के तहत तालाब के जीर्णोद्धार का उल्लेख है। रिपोर्ट में राजस्व विभाग की टीम और ग्रामीणों की मौजूदगी में तालाब को चिह्नित करने तथा संबंधित विभाग को सूचना देने की बात भी दर्ज है।
 
रिपोर्ट में टूटे हुए हिस्से का उल्लेख होने के साथ उसे दुरुस्त कराने के संबंध में निर्देश दिए जाने की बात भी लिखी प्रतीत होती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि रिपोर्ट में दर्ज सूचना संबंधित विभाग तक कब और किस माध्यम से पहुंची थी। यदि सूचना दी गई थी तो उस पर क्या कार्रवाई हुई और यदि संबंधित अधिकारी तक सूचना नहीं पहुंची, तो इसकी वजह क्या रही इन सवालों का जवाब विभागीय अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर ही सामने आ सकेगा।
 
एक्सईएन बोले जितनी जमीन मिली उसी के अनुसार कराया काम।
 
लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रामेश्वर सिंह ने बताया कि तालाब के नवीनीकरण के दौरान विभाग को जिस स्थान पर और जितनी जमीन उपलब्ध कराई गई, उसी के अनुसार कार्य कराया गया। उन्होंने कहा कि शिकायत के बाद यदि राजस्व विभाग की टीम दोबारा पैमाइश कराकर जमीन उपलब्ध कराती है, तो विभाग उस पर आगे कार्य कराएगा। वाटर रैंप टूटने के संबंध में अधिशासी अभियंता ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। जानकारी मिलने के बाद जांच कराने की बात भी उन्होंने कही। उनका यह बयान नायब तहसीलदार की रिपोर्ट में रैंप टूटने का उल्लेख होने के कारण महत्वपूर्ण है। अब यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि रिपोर्ट विभाग को मिली थी या नहीं और यदि मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।
 
एक रैंप ढहा, दूसरा क्षतिग्रस्त, तीसरे पर भी खतरा।
 
ग्रामीणों के मुताबिक, तालाब पर बनाए गए तीन वाटर रैंपों में से एक पूरी तरह धराशायी हो चुका है, दूसरा क्षतिग्रस्त है और तीसरे के भी टूटने की आशंका है। इससे निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, तकनीकी मानकों और कार्य की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
 
विभाग का कहना है कि जितनी जमीन उपलब्ध कराई गई, उसी के अनुसार काम कराया गया। ऐसे में स्वीकृत कार्ययोजना, वास्तविक सीमांकन, माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान जरूरी है। इससे पता चल सकेगा कि निर्माण निर्धारित दायरे में हुआ या नहीं और रैंपों के क्षतिग्रस्त होने के पीछे क्या कारण हैं।
 
सरकारी धन के सदुपयोग और जवाबदेही की जांच जरूरी।
 
तालाबों का नवीनीकरण जल संरक्षण और भूजल संवर्धन के उद्देश्य से किया जाता है। ऐसे में निर्माण के कुछ समय बाद ही रैंपों का क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है। यदि तकनीकी जांच में निर्माण मानकों की अनदेखी या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
 
ग्रामीणों ने मांग की है कि तालाब के नवीनीकरण की स्वीकृत लागत, कार्ययोजना माप पुस्तिका, भुगतान संबंधी अभिलेख और निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की जांच कराई जाए। साथ ही राजस्व विभाग की रिपोर्ट और लघु सिंचाई विभाग के बीच सूचना के आदान-प्रदान की भी पड़ताल हो। तकनीकी टीम मौके पर पहुंचकर तीनों वाटर रैंपों की स्थिति का आकलन करे और आवश्यक मरम्मत सुनिश्चित की जाए।
 
बहादुरपुर विकासखंड की कोटवा ग्रामसभा में तालाब का यह मामला अब केवल निर्माण की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। नायब तहसीलदार की रिपोर्ट में रैंप टूटने का उल्लेख और अधिशासी अभियंता का जानकारी नहीं होने संबंधी बयान दोनों के बीच अंतर स्पष्ट किया जाना जरूरी है। रिपोर्ट विभाग को कब मिली संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की और क्षतिग्रस्त निर्माण की जांच कब होगी इन सवालों के जवाब से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
 
 
 

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