युवाओं के रोजगार का बेहतर विकल्प है मशरूम उत्पादन-, संयुक्त निदेशक, उद्यान

एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक ने किया।

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स्वतंत्र प्रभात।
 
 ब्यूरो प्रयागराज 
 
 एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक ने किया। कार्यक्रम में मशरूम उत्पादन से जुड़े विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों एवं बड़ी संख्या में प्रशिक्षु युवाओं ने प्रतिभाग किया।
 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संयुक्त निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रशिक्षित युवाओं के लिए मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण स्वरोजगार और रोजगार का एक बेहतर विकल्प बन सकता है। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग द्वारा बड़ी मशरूम इकाई की स्थापना के लिए लगभग 30 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत तक, यानी करीब 12 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
 
उन्होंने कहा कि इच्छुक युवा कंपोस्ट इकाई, स्पॉन इकाई तथा मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिए परियोजना तैयार कर विभाग से नियमानुसार अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। इससे युवाओं को स्वरोजगार के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
 
 नवंबर-दिसंबर से फरवरी तक अनुकूल मौसम।
 
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था शुभ सेवा एग्रो वेलफेयर फाउंडेशन, लखनऊ के सीईओ डॉ. एस. आर. बघेल ने प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी दी।
 
डॉ. बघेल ने बताया कि जो युवा मशरूम उत्पादन का नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें अक्टूबर माह से ही कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए, ताकि समय पर उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत में नवंबर, दिसंबर, जनवरी और फरवरी के दौरान तापमान कम रहने के कारण मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल परिस्थितियां रहती हैं। ऑयस्टर एवं बटन मशरूम की विशेषताओं और बाजार की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बटन मशरूम की अच्छी बाजार मांग होने के कारण इसकी खेती किसानों एवं नए उद्यमियों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन सकती ह
 
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कु. ईशा ने ऑयस्टर मशरूम के उत्पादन की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऑयस्टर मशरूम अपेक्षाकृत आसानी से तैयार होने वाला मशरूम है और कम संसाधनों में भी इसका उत्पादन शुरू किया जा सकता है।
 
कु. ईशा ने प्रतिभागियों को मशरूम की कंपोस्ट तैयार करने की विधि, उपचार प्रक्रिया तथा फंगस एवं संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के सवालों का समाधान करते हुए व्यावहारिक जानकारी भी साझा की।
 
कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय, शुअट्स नैनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, अनुराग तायडे सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे तथा मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाओं पर जानकारी प्रदान की।
 
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, किसानों एवं नए उद्यमियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक से परिचित कराते हुए उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ना है। 
 
 प्रशिक्षण प्रभारी वीके सिंह, मनीष कुमार यादव विवेक श्रीवास्तव अमित सिंह सूरज सिंह आदि विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ-साथ प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर आदि के प्रतिभागियों ने भाग लिया
 
 

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