संपादकीय पेज के लिए समसामयिक आलेख रियल लाइफ हीरो स्मित मच्छार को सलाम 

कैप्टन स्मित मछार एक भारतीय पायलट हैं जिन्होंने फ्लाईदुबई की उड़ान में सह-पायलट के हमले और गंभीर खतरे के बावजूद अदम्य साहस दिखाते हुए 180 यात्रियों की जान बचाई।

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कैप्टन स्मित मछार एक भारतीय पायलट हैं जिन्होंने फ्लाईदुबई की उड़ान में सह-पायलट के हमले और गंभीर खतरे के बावजूद अदम्य साहस दिखाते हुए 180 यात्रियों की जान बचाई।आपने हालीवुड बालीवुड की बहुत सारी फिल्मों में अनेक हीरो फिल्मी परदे पर देखे होंगे जो कहानी की मांग के अनुसार अपनी बहादुरी का अभिनय कर दर्शकों की वाहवाही लूटते है लेकिन भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने रियल लाइफ में असामान्य परिस्थितियों में आसमान में अपने साहस, धैर्य और कौशल से भारत का नाम रोशन कर दिया। जब आसमान में आफत हो, उन पर चाकू से वार हो, वह लहूलुहान हो.. ऐसी विपरित असामान्य जोखिम भरी कठिन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी जान पर खेल कर 174 विमान यात्रियों का जीवन बचा लिया। वह रियल लाइफ के वास्तविक हीरो हैं आज पूरी दुनिया उनकी साहस और सूझबूझ को सलाम कर रही है हर भारतीय का सिर उन्होंने गर्व और सम्मान से ऊंचा कर दिया है और दुनिया को बता दिया है कि भारतीय जांबाज कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत हौसले और सूझबूझ से बड़ी से बड़ी मुसीबत से टकराने और अपनी जान की बाजी लगा कर भी निर्दोषों की जान बचाने का जिगरा रखते हैं। आज दुनिया के साथ-साथ देश को स्मित पर नाज है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों ने उनकी इस वीरता को सलाम किया है। 
 
आपको पता है कि 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में एक अत्यंत गंभीर स्थिति पैदा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, सह-पायलट ने कॉकपिट में स्मित मच्छार पर चाकू से हमला किया और विमान को 'क्रैश' करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने नियंत्रण और परिस्थितियों पर अपनी पकड़ बनाए रखी। संकट की इस घड़ी में विमान को सऊदी अरब के ताबुक में उतारा गया और विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बच गई। इस घटना की भयावहता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ ही मिनटों में सैकड़ों परिवारों के जीवन में अंधेरा छा सकता था । विमान आकाश में था, कॉकपिट में हमलावर चाकू से हमला कर रहा था और पायलट स्मित स्वयं गंभीर रूप से घायल था। गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ होने के बाद भी कैप्टन स्मित ने सूझबूझ दिखाई और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर क्रू व यात्रियों को सतर्क किया। ऐसे समय में घबराहट स्वाभाविक होती है, लेकिन मच्छार ने अपने व्यक्तिगत दर्द और भय से ऊपर यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखा। यही कर्तव्य-बोध किसी सामान्य पेशेवर को असाधारण बना देता है। स्मित मच्छार की कहानी प्रशिक्षण और पेशेवर अनुशासन का परिणाम है।
 
जानकारी के अनुसार वे लंबे समय तक स्पाइसजेट में कार्य कर चुके हैं और जून 2022 से फ्लाईदुबई के बोइंग 737 बेड़े में कैप्टन के रूप में कार्यरत हैं। रिपोर्टों में उनके लगभग 9,750 घंटे के उड़ान और 12 साल का लंबा अनुभव है। अनुभव चाहे कितना ही लंबा क्यों न हो, लेकिन जब कोई मुसीबत में होता है या उस पर हमला होता है तो अच्छा-खासा इंसान हिम्मत खो देता है और हार जाता है। खुशी इस बात की है कि स्मित ने हिम्मत से काम लिया। उन्होंने अपने से अधिक विमान यात्रियों की जीवन सुरक्षा को प्राथमिकता दी, जिस कारण वह दुनिया के हीरो बन गए। उनकी बहादुरी की चर्चा भारत तक सीमित नहीं रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 'हीरो' बताते हुए कहा कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस दिखाया और बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। इजरायल के प्रधानमंत्री बेजामिन नेतन्याहू सहित वहां के लोगों ने भी भारतीय पायलट के प्रति आभार व्यक्त किया है, क्योंकि विमान में बड़ी संख्या में इजरायली यात्री सवार थे। स्मित को बधाई देने में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने भी स्मित की पीठ थपथपाई। थोड़ा पीछे जाएं तो 1986 में नीरजा ने आतंकवादियों के सामने अद्भुत साहस दिखाकर यात्रियों की जान बचाई थी। आज स्मित मच्छार का साहस भी उसी मानवीय परंपरा की एक नई कड़ी दिखाई देता है। दोनों की वीरता हमको प्रेरित करती है। साथ ही, यह बताती है कि धैर्य, समर्पण और वीरता से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। स्मित के साहस की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्यों कि विमान में तमाम यात्री थे। अगर वो जरा भी विचलित होते तो सैकड़ों यात्रियों की जान जा सकती थी। गंभीर चोटों के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए अबू धाबी शिफ्ट किया गया है, जहां उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।
 असली नायक वह नहीं जिसे कैमरे तलाशते फिरें; असली नायक वह है जो संकट की घड़ी में अपने कर्तव्य से पीछे न हटे। यही कारण है कि उनका साहस किसी एक देश, धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है। विमान में बैठे यात्रियों की राष्ट्रीयता अलग हो सकती थी, लेकिन जीवन की कीमत सबके लिए समान थी। आज भारत को अपने इस बेटे पर गर्व है। साथ ही, देश की प्रार्थना भी यही है कि गंभीर रूप से घायल कैप्टन मच्छार शीघ्र स्वस्थ हों । उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाती रहे कि कर्तव्य के सामने भय छोटा पड़ सकता है और साहस के सामने संकट भी हार सकता है।
 
आपको बता दें कि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 1 अक्टूबर 2026 को इस राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की आधिकारिक घोषणा की है.इस पुरस्कार के साथ कैप्टन मछार को ₹25 लाख की नकद राशि भी दी जाएगी. यह सम्मान उन्हें उनके पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटने के बाद गुजरात में एक विशेष समारोह के दौरान दिया जाएगा। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी और रिपोर्ट्स के अनुसार उनके नाम पर ₹25 लाख के एक विशेष ब्रेवरी अवॉर्ड (वीरता पुरस्कार) की घोषणा की गई है।
 
राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन मछार को शांति काल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार 'अशोक चक्र' से सम्मानित करने का अनुरोध किया है.
 
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने भी पीएमओ और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र भेजकर उन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार या उपयुक्त नागरिक सम्मान देने की मजबूत सिफारिश की है.भारत समेत दुनिया को इस रियल हीरो पर गर्व है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 40 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) सम्पर्क 9219179431 journalistmanoj453@gmail.com
 
 

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