फलाहारी बाबा आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन उमड़ा भक्तों का सैलाब

कथा व्यास ने गज-ग्राह की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम और समुद्र से प्राप्त रत्नों का प्रसंग सुनाया।

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स्वतंत्र प्रभात ।
 
नैनी, प्रयागराज 
 
अरैल घाट स्थित श्री श्री 1008 श्री फलाहारी बाबा आश्रम में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथा सुनने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा का आयोजन परम पूज्य गुरुदेव एवं आश्रम के पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 श्री राम रतन दास जी महाराज के तत्वावधान में किया जा रहा है।अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास पूज्य मिथिलेश दास जी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि कथा के श्रवण से मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने वैष्णव के गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि जिसके हृदय में भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति, सरलता, सहनशीलता, दया, परोपकार और उदारता का भाव हो, वही सच्चा वैष्णव है।
 
कथा व्यास ने गज-ग्राह की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम और समुद्र से प्राप्त रत्नों का प्रसंग सुनाया। इसके साथ ही भगवान के मोहिनी अवतार, कश्यप अवतार तथा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भी वर्णन किया गया। जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और पूरे आश्रम परिसर में जयकारे गूंजते रहे।इस अवसर पर फलाहारी बाबा आश्रम के उत्तराधिकारी पूज्य संत राजा रामदास जी महाराज, सब इंस्पेक्टर ओमप्रकाश उपाध्याय, रमेश चंद्र नेगी, चौरसिया जी, कृपा शंकर दास सहित अनेक संत-महात्मा एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा में सच्चा आश्रम की प्राचार्या, श्रीकृष्ण जी, श्री गुरु विकास राव, श्री जय बाबू तिवारी, महंत मदन गोपाल दास जी (खड़िया बाजार), पंडित श्री कृष्ण तिवारी (भागवत प्रवक्ता), लल्लू कुशवाहा, हीरा सिंह, सुमित पांडे, श्री राम केला से शर्मा सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने सहभागिता की।
 
 
 

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