खेती चौपट: AI के गलत मशवरे से फसलें बर्बाद
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल के बीच सामने आ रही सामाजिक चुनौतियां, सरकार नियमों से साध रही संतुलन की कोशिश
बीजिंग। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा चीन अब इसके बढ़ते इस्तेमाल से पैदा होने वाली सामाजिक चुनौतियों से भी जूझ रहा है। सरकार देश में एआई के विकास और उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है, लेकिन इसके अत्यधिक इस्तेमाल के कारण सामने आ रहे मामले नई चिंताओं को जन्म दे रहे हैं। खेती से लेकर बच्चों के व्यवहार और मनोरंजन की दुनिया तक एआई के असर ने बहस तेज कर दी है।
दुनिया के कई देशों में एआई के इस्तेमाल, नियमन और इसके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चर्चा चल रही है। इसी बीच पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा था कि दोनों देशों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि एआई हमेशा इंसानों के नियंत्रण में रहे। वहीं, ट्रंप ने भी प्रमुख एआई कंपनियों के साथ इसके नियंत्रण और सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर चर्चा की है।
एआई की सलाह से किसान की फसल बर्बाद
चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्टों में एआई पर बढ़ती निर्भरता से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। एक मामले में एक किसान ने खेती से संबंधित सलाह के लिए एआई का सहारा लिया, लेकिन उसकी करीब 25 एकड़ जमीन की फसल बर्बाद हो गई। इस घटना ने कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एआई पर आंख मूंदकर भरोसा करने के जोखिम को उजागर किया है।
एआई का असर बच्चों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। कुछ बच्चे चैटबॉट के साथ इस कदर जुड़ रहे हैं कि वे चाहते हैं कि उनके माता-पिता भी उनसे उसी तरह बातचीत करें, जैसे एआई आधारित चैटबॉट करते हैं। विशेषज्ञों के लिए यह स्थिति बच्चों के सामाजिक और पारिवारिक संबंधों पर तकनीक के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता का विषय बन रही है।
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मनोरंजन के क्षेत्र में भी एआई के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एआई की मदद से तैयार किए जा रहे नाटकों और अन्य सामग्री में कई पात्र एक-दूसरे की हूबहू नकल जैसे दिखाई दे रहे हैं। इससे रचनात्मकता, मौलिकता और मानवीय कल्पनाशीलता पर तकनीक के प्रभाव को लेकर बहस शुरू हो गई है।
अमेरिका से होड़ के बीच बढ़ी चुनौती
चीन एआई के क्षेत्र में अमेरिका के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। सरकार उद्योगों, शोध संस्थानों और तकनीकी कंपनियों को एआई के विकास के लिए प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि, इसके साथ ही तकनीक के दुरुपयोग और उससे पैदा होने वाली सामाजिक समस्याओं से निपटना भी चुनौती बन गया है।
चीन सरकार एआई के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए नए नियमों और न्यायिक दिशा-निर्देशों पर भी जोर दे रही है। उद्देश्य यह है कि तकनीकी विकास की रफ्तार बनी रहे, लेकिन इसके सामाजिक प्रभावों पर भी निगरानी रखी जा सके।
कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के चाइना इनिशिएटिव के सह-निदेशक स्कॉट सिंगर के मुताबिक, चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी यह समझ रही है कि तकनीकी विकास के साथ सामाजिक चुनौतियां भी बढ़ेंगी। ऐसे में चीन के सामने चुनौती एआई को रोकने की नहीं, बल्कि उसके विकास और सामाजिक प्रभावों के बीच संतुलन बनाने की है।


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