आवारा कुत्तों ने हिरण को दौड़ाकर किया गंभीर घायल, उपचार से पहले मौत

यूपी सीमा से भटककर अजीतपुर गांव पहुंचा था हिरण, वन विभाग ने शव का कराया पोस्टमार्टम

हर्षिता यादव  Picture
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सितारगंज। यूपी सीमा की ओर से भटककर आबादी क्षेत्र में पहुंचे एक हिरण को आवारा कुत्तों ने दौड़ाकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। ग्रामीणों और वन विभाग की टीम ने हिरण को बचाने का प्रयास किया, लेकिन शरीर पर गंभीर चोटें होने के कारण उसकी मौत हो गई। वन विभाग ने हिरण के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है। मामले में वन्यजीव अपराध पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी गई है।
 
वन विभाग के अनुसार मंगलवार को करीब 3:30 बजे बराकोली वन क्षेत्र की बैगुल डैम बीट के अंतर्गत आने वाले गांव अजीतपुर में एक हिरण के घायल अवस्था में पड़े होने की सूचना मिली। ग्रामीणों ने बताया कि हिरण आबादी क्षेत्र में भटककर पहुंचा था और आवारा कुत्ते उसके पीछे पड़ गए। कुत्तों से बचने के लिए हिरण काफी देर तक भागता रहा। इस दौरान कुत्तों ने उसे घेरकर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
 
हिरण के घायल होने की सूचना मिलते ही बराकोली वन क्षेत्र के रेंजर घनानंद चनियाल ने वनकर्मियों की टीम गठित कर मौके पर भेजी। वनकर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से हिरण को सुरक्षित करने और उसकी जान बचाने का प्रयास किया। टीम द्वारा उसे बचाने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन गंभीर चोटों और अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। कुछ ही देर में हिरण ने दम तोड़ दिया।
 
इसके बाद वन विभाग की टीम ने हिरण के शव को कब्जे में लेकर ढोलावन वन परिसर पहुंचाया। नियमानुसार वहां पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मृगदाक्षी यादव और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय कुमार ने हिरण का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की।
 
रेंजर घनानंद चनियाल ने बताया कि मामले में वन्यजीव अपराध पंजीकृत कर लिया गया है। प्रकरण की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि आबादी क्षेत्र में किसी भी वन्यजीव के पहुंचने, घायल होने या संकट में होने की जानकारी मिलने पर उसे पकड़ने या उसके पीछे जाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते वन्यजीव को सुरक्षित किया जा सके।
 
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के आबादी क्षेत्र में पहुंचने की घटनाओं में ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे मामलों में भीड़ लगाने या वन्यजीव को घेरने के बजाय विभागीय टीम के पहुंचने का इंतजार किया जाना चाहिए।

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