सावन के अंतिम सोमवार को जगह जगह हुआ रुद्राभिषेक

रुद्राभिषेक सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना का सबसे प्रभावी और कल्याणकारी अनुष्ठान है।

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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता 
 
सिद्धार्थनगर।
 
रुद्राभिषेक सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना का सबसे प्रभावी और कल्याणकारी अनुष्ठान है। जिसमें शिवलिंग पर मंत्रोच्चार के साथ पवित्र द्रव्यों की धारा अर्पित की जाती है। उसका बाजार कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्र में तमाम श्रद्धालुओं ने मंदिर में एवं अपने घर में रुद्राभिषेक किया।
 
श्री पयोहारी आश्रम उसका राजा के पुजारी पंडित रमाकांत शुक्ला ने  बताया कि शास्त्रों के अनुसार, 'रुद्र' स्वयं भगवान शिव का उग्र रूप हैं और 'अभिषेक' का अर्थ है स्नान कराना, अर्थात रुद्राभिषेक का सीधा अर्थ है भगवान रुद्र का पावन अभिषेक करना। यह अनुष्ठान मुख्य रूप से ऋग्वेद और यजुर्वेद के श्री रुद्रम मंत्रों के पाठ के साथ संपन्न किया जाता है। वैदिक नियमों के अनुसार, अनुष्ठान को निर्विघ्न पूरा करने के लिए सबसे पहले भगवान गणेश और माता गौरी का पूजन होता है।
 
यजमान अपने नाम, गोत्र और विशिष्ट मनोकामना का उच्चारण कर हाथ में जल लेकर संकल्प करता है।सुख-समृद्धि और ग्रहों की शांति के लिए पवित्र कलश की स्थापना कर नौ ग्रहों का आह्वान किया जाता है।शिवलिंग पर निरंतर शिव मंत्रों जैसे महामृत्युंजय मंत्र या 'ॐ नमः शिवाय के साथ विभिन्न द्रव्यों की धार चढ़ाई जाती है। कस्बा में नगर पंचायत की चेयरमैन मंजू जायसवाल पत्नी हेमंत कुमार जायसवाल ने भी अपने घर परिवार में रुद्राभिषेक किया।
 
 

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