:लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कजरी गीतों ने बांधा समां

करछना स्थित अपने लोकगीतों की लोक संस्कृति को संजोए रखने के उद्देश्य से करछना में  आयोजित द्वितीय कजरी उत्सव के दौरान मंच पर लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत विविध कजरी गीतों ने खूब समां बांधा।

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स्वतंत्र प्रभात ।
 
नैनी, प्रयागराज।
 
करछना स्थित अपने लोकगीतों की लोक संस्कृति को संजोए रखने के उद्देश्य से करछना में  आयोजित द्वितीय कजरी उत्सव के दौरान मंच पर लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत विविध कजरी गीतों ने खूब समां बांधा।
 
प्रधानाचार्य मदन मोहन शुक्ला एवं लीला दुबे द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के उपरान्त शुरू हुए कार्यक्रम में राजन जी की कजरी-जब से परदेश गइले राजनवा,अंगनवा में जी ना लगे,खूब सराही गई।आकाशवाणी, दूरदर्शन की चर्चित लोकगायिका रंजना त्रिपाठी, अभिषेक सिंह और दल द्वारा प्रस्तुत कजरी - कहसे खेलह जाऊ, सावन में कजरिया,बरसा घिरि आई ननदी,जैसे गीतों पर श्रोता झूम उठे।शिल्पा कुशवाहा,मुक्ति पाण्डेय,रीना त्रिपाठी और रागिनी श्रीवास्तव और आशीष शर्मा के बाद कार्यक्रम की संयोजिका मंजरी श्रीवास्तव की मिर्जापुरी कजरी,झूला गीतों ने खूब समां
 
 

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