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जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई तेज, आदिवासियों के हक की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी सपा
पावर प्लांट और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों की भूमि तथा जंगलों को गलत तरीके से उद्योगपतियों को सौंपने की कोशिशें की जा रही हैं- सपा प्रतिनिधिमंडल
कोन/सोनभद्र-
समाजवादी पार्टी ने सोनभद्र के जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर शनिवार को राबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के तरिया इलाके में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा, जहां ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। इस दौरान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि आदिवासियों की पुश्तैनी जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को किसी भी कीमत पर उद्योगपतियों के हवाले नहीं होने दिया जाएगा। यदि स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन हुआ तो समाजवादी पार्टी सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय सचिव अविनाश कुशवाहा, समाजवादी जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व्यास जी गोंड, जिला अध्यक्ष रामनिहोर यादव, प्रदेश अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ डॉ. रवि गोंड बड़कू, रमेश सिंह यादव तथा सुनील सिंह गोंड के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने तरिया क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों एवं आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी समस्याओं, विस्थापन की आशंका, भूमि अधिग्रहण तथा विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को नेताओं के सामने रखा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सोनभद्र अपनी प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, पहाड़ों, जल स्रोतों और आदिवासी संस्कृति के कारण पूरे प्रदेश में विशेष पहचान रखता है। यहां का पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यदि हजारों हेक्टेयर वन एवं कृषि भूमि बड़े उद्योगों और पावर प्लांटों के लिए अधिग्रहित की जाती है तो इसका सीधा असर न केवल यहां के आदिवासी और ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा, बल्कि पर्यावरण, जलवायु और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
नेताओं ने आरोप लगाया कि पावर प्लांट और अन्य औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों की भूमि तथा जंगलों को गलत तरीके से उद्योगपतियों को सौंपने की कोशिशें की जा रही हैं। इससे हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, पहचान और जीवन का आधार हैं। इनकी रक्षा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
समाजवादी पार्टी नेताओं ने कहा कि किसी भी विकास परियोजना से पहले ग्राम सभा की सहमति, वनाधिकार कानून और स्थानीय लोगों के अधिकारों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। बिना सहमति के किसी भी परिवार को उसकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करना न्यायसंगत नहीं है। पार्टी हर स्तर पर आदिवासियों की आवाज को बुलंद करेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन चलाएगी।


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