घुटनों की समस्या के स्थाई समाधान के लिए किया कोरी रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का लाइव प्रदर्शन

यह तकनीक मरीज को न केवल तुरंत चलने फिरने में बल्कि कम पर वापस जाने में भी सफलता प्रदान करती है।

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कानपुर। आज विश्व में तेजी बढ़ती हुई बीमारी गठिया के खिलाफ सर्वाधिक सफलता का पूर्ण श्रेय उस अत्याधुनिक कोरी रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम को जाता है ,जिसमें रोबोटिक टोटल नी यानी घुटना रिसरफ्रेसिंग के प्रयोग के फलस्वरूप केवल छोटा चीरा ही लगता है। रक्तस्राव भी कम होता है। मांस पेशियों को भी कोई नुकसान नहीं होता। उनका पूरी तरह से बचाव होता है। साथ ही फ़िज़ीओथेरपी भी नहीं करानी पड़ती। उससे भी बचाव होता है।
 
यह तकनीक मरीज को न केवल तुरंत चलने फिरने में बल्कि कम पर वापस जाने में भी सफलता प्रदान करती है। जहां तक तकनीक के अंतिम परिणाम का सवाल है। मरीज का घुटना वैसा ही नॉर्मल होता है, जैसा कि कभी जवानी में हुआ करता था। यह दावा यहां एक पत्रकार वार्ता में लगभग 25 हजार से ज्यादा सर्जरी करके एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित करने वाले बर्रा 6 स्थित सत्य हॉस्पिटल के डायरेक्टर  हड्डी रोगों के साथ ही रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के भी विशेषज्ञ डॉ.अमित कुमार अग्रवाल ने किया। 
 
अत्याधुनिक कोरी रोबोटिक तकनीक से रियल टाइम टोटल नी (घुटना) रिसरफ्रेसिंग की सुविधा विश्व स्तरीय आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण सत्या हॉस्पिटल में भी उपलब्ध होने की जानकारी देते हुए रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ.अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह आधुनिक तकनीक प्रत्येक मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार व्यक्तिगत सर्जिकल योजना बनाने में सहायता करती है तथा ऑपरेशन के दौरान वास्तविक समय (रियल टाइम) में सटीक जानकारी भी उपलब्ध कराती है। 
 
एक सवाल के जवाब में गठिया, नी रिप्लेशमेंट, हिप रिप्लेशमेंट, आर्थोस्कोपिक सर्जरी जैसे जटिल ऑपरेशन कर मरीजों को शत प्रतिशत लाभ पहुंचाने वाले डॉक्टर ए के अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि रोबोट स्वयं ऑपरेशन नहीं करता, बल्कि सर्जन के नियंत्रण में कार्य करते हुए सर्जरी की सटीकता बढ़ाने में सहायता करता है। बूढे व वृद्ध लोगों के गठिया जैसी बीमारी का सफल घुटना प्रत्यारोपण या अन्य ऑपरेशन से उन्हें न केवल अपनी सामान्य जिदंगी प्रदान करने बल्कि उन्हें नौजवान भी महसूस कराने वाले विश्व प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉक्टर एके अग्रवाल ने बताया कि इस नई तकनीक के प्रयोग से छोटा चीरा, कम रक्तस्राव, मांस पेशियों को बचाव, फ़िज़ीओथेरपी से बचाव, तुरंत चलना व काम पर वापस जाना तथा जवानी के दिनों जैसा पूरी तरह नोर्मल घुटना प्राप्त करने जैसे अनेक लाभ होते हैं।
 
उन्होंने बताया कि सत्या हॉस्पिटल में कोरी सिस्टम द्वारा प्रथम रोबोटिक घुटना रिसरफ्रेसिंग लंबे समय से गंभीर घुटना गठिया से पीड़ित चलने फिरने में असमर्थ 75 वर्षीय सुश्री सतीश सचदेवा का सफलतापूर्वक किया गया। उनकी पुनर्वास प्रक्रिया चिकित्सकीय निगरानी में प्रारम्भकी जाएगी। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि रोबोटिक तकनीक आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में सटीकता और व्यक्तिगत उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों को भी सी ओ आर आई रोबोट का लाइव प्रदर्शन एवं इसकी कार्यप्रणाली भी दिखाई गई। इस दौरान जानी मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनीषा अग्रवाल ने आगतों का आभार व्यक्त किया।

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