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औचक निरीक्षण में बेनकाब हुई स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, डॉक्टर-कर्मचारियों पर कार्रवाई की तैयारी
सरकारी अस्पताल में ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर-कर्मचारी, संयुक्त मजिस्ट्रेट के निरीक्षण से मचा हड़कंप
रिपोर्टर/ रामअशीष त्रिपाठी (ख़जनी तहसील)
ख़जनी/गोरखपुर :तहसील खजनी क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था की एक चौंकाने वाली तस्वीर सोमवार को उस समय सामने आई, जब संयुक्त मजिस्ट्रेट कुणाल रस्तोगी और तहसीलदार ध्रुवेश कुमार सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनही का औचक निरीक्षण किया। दोपहर करीब 3:30 बजे किए गए निरीक्षण के दौरान अस्पताल में डॉक्टर से लेकर स्वास्थ्य विभाग का कोई भी कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिला। अस्पताल परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ था। इस लापरवाही को देखकर प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई। निरीक्षण की खबर से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
ओपीडी से लेकर वार्ड तक नहीं मिला कोई जिम्मेदार
शासन की मंशा के अनुरूप सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निर्धारित समय तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी चिकित्सकों और कर्मचारियों की है। इसके बावजूद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरनही में ड्यूटी के समय किसी भी जिम्मेदार कर्मचारी का मौजूद नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। संयुक्त मजिस्ट्रेट और तहसीलदार ने अस्पताल के विभिन्न कक्षों, वार्डों और ओपीडी का निरीक्षण किया। इस दौरान चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े कर्मचारी नदारद मिले। दवा वितरण कक्ष सहित अस्पताल के अन्य हिस्सों में भी कोई जिम्मेदार व्यक्ति दिखाई नहीं दिया।

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Read More निराश्रित गोवंशों का जमावड़ा ; किसान की फसलों को बर्बाद करने के साथ गो-संरक्षण की खोल रहा पोलसरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित मिले चिकित्सकों और कर्मचारियों का विवरण तैयार किया गया है। संयुक्त मजिस्ट्रेट कुणाल रस्तोगी ने बताया कि औचक निरीक्षण में मिली अनियमितताओं और अनुपस्थित कर्मचारियों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट शासन एवं संबंधित उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी, जिससे जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ही गरीब और जरूरतमंद परिवारों के इलाज का प्रमुख सहारा हैं। ऐसे में यदि ड्यूटी के समय डॉक्टर और कर्मचारी ही अस्पताल से गायब रहेंगे तो मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ेगा। प्रशासन के इस औचक निरीक्षण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और हरनही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था में कब तक सुधार होता है।


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