अमेरिका में गन कल्चर का खूनी चेहरा

स्कूलों में मासूमों की मौत का सिलसिला कब थमेगा, हथियारों की आसान उपलब्धता पर सख्ती जरूरी

हर्षिता यादव  Picture
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अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में प्राथमिक विद्यालय में हुई गोलीबारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। गुरुवार 15 अक्टूबर 2026 को 16 वर्षीय किशोर की गोलीबारी में पांच, आठ और 11 वर्ष के तीन बच्चों तथा एक शिक्षिका की मौत हो गई। इस घटना में एक अन्य बच्चा और एक शिक्षिका घायल हुए। पुलिस के अनुसार हमलावर की मृत्यु भी घटनास्थल पर हुई।
 
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इतनी कम उम्र के बच्चों को शिक्षा, संस्कार और सुरक्षित भविष्य देने वाले विद्यालय में ही उनकी जिंदगी छिन गई। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें, खिलौने और रंगीन पेंसिलें होनी चाहिएं, उस उम्र में उन्हें गोलियों के भय का सामना करना पड़ रहा है। यह केवल एक शहर या देश का संकट नहीं, बल्कि आधुनिक समाज की सुरक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं के सामने खड़ा गंभीर प्रश्न है।
 
अमेरिका विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा और आर्थिक विकास के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इसके बावजूद विद्यालयों में बार-बार होने वाली गोलीबारी उसकी सामाजिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। हथियार रखने के अधिकार को लेकर वहां लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस चलती रही है। हथियारों के प्रति आकर्षण, उनका आसानी से उपलब्ध होना, घरेलू स्तर पर असुरक्षित रखरखाव और हिंसा को सामान्य मानने वाली कुछ सांस्कृतिक प्रवृत्तियां इस समस्या को जटिल बनाती हैं।
 
हालांकि अमेरिका के सभी नागरिक हथियारों का समर्थन नहीं करते और बड़ी संख्या में लोग अधिक कठोर सुरक्षा नियमों की मांग भी करते हैं। इसलिए पूरे अमेरिकी समाज को एक ही नजर से देखना उचित नहीं होगा। वास्तविक प्रश्न यह है कि व्यक्तिगत अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच ऐसा संतुलन कैसे स्थापित हो, जिससे बच्चों का जीवन सुरक्षित रह सके।
 
पिछले तीन वर्षों की घटनाएं बताती हैं कि विद्यालयों में गोलीबारी की समस्या समाप्त नहीं हुई है। वर्ष 2023 में टेनेसी राज्य के नैशविले स्थित एक ईसाई विद्यालय में 27 मार्च को हुई गोलीबारी में तीन बच्चों और तीन वयस्कों की मौत हुई थी। घटना ने देशभर में विद्यालयों की सुरक्षा और हथियारों पर नियंत्रण को लेकर बहस तेज कर दी थी। इसके बाद भी अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में गोलीबारी की घटनाएं सामने आती रहीं। शिक्षा सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में विद्यालयों की संपत्ति पर ऐसी 38 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें लोग घायल हुए या उनकी मौत हुई। इन आंकड़ों में विद्यालय परिसर और घटनाओं की परिभाषा के आधार पर अंतर संभव है। 
 
वर्ष 2024 भी चिंताजनक रहा। चार जनवरी को आयोवा के पेरी हाई स्कूल में गोलीबारी हुई, जिसमें एक विद्यार्थी की मौत हुई और कई विद्यार्थी तथा कर्मचारी घायल हुए। विद्यालय के प्रधानाचार्य की बाद में चोटों के कारण मृत्यु हो गई। दिसंबर में विस्कॉन्सिन के मैडिसन स्थित एबंडेंट लाइफ क्रिश्चियन स्कूल में एक किशोर विद्यार्थी ने गोलीबारी की। इस घटना में दो लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।
 
इन घटनाओं ने फिर यह सवाल खड़ा किया कि विद्यालयों में सुरक्षा के लिए केवल दरवाजे बंद करना और निगरानी बढ़ाना पर्याप्त है या समाज को हिंसा के मूल कारणों पर भी ध्यान देना होगा। शिक्षा सप्ताह के अनुसार, वर्ष 2024 में विद्यालयों में गोलीबारी की 39 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें लोग घायल हुए या मारे गए। 
 
वर्ष 2025 में भी यह सिलसिला नहीं थमा। 27 अगस्त को मिनियापोलिस के एक कैथोलिक विद्यालय से जुड़े गिरजाघर में प्रार्थना के दौरान हुई गोलीबारी में दो बच्चों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हुए। घटना के समय वहां बच्चे और अन्य लोग मौजूद थे। इस घटना ने धार्मिक स्थलों तथा विद्यालयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई। शिक्षा सप्ताह के अनुसार, वर्ष 2025 में विद्यालयों में गोलीबारी की 18 ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई या वह घायल हुआ। यह संख्या पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कम थी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि समस्या समाप्त हो गई। प्रत्येक घटना अनेक परिवारों के जीवन को हमेशा के लिए बदल देती है।
 
अब वर्ष 2026 में ओरेगन की घटना ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि सुरक्षा के मौजूदा उपायों की समीक्षा आवश्यक है। समाचारों के अनुसार, हमले में इस्तेमाल की गई बंदूक हमलावर की मां ने खरीदी थी। यह तथ्य हथियारों को घर में सुरक्षित रखने और बच्चों की पहुंच से दूर रखने की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। किसी भी हथियार का स्वामित्व केवल व्यक्तिगत अधिकार का विषय नहीं हो सकता, उसके साथ समाज और परिवार के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। यदि हथियार असुरक्षित ढंग से रखे जाते हैं या उन तक नाबालिगों की पहुंच होती है, तो परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। जांच पूरी होने से पहले हमले के कारणों के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। 
 
इस समस्या के समाधान के लिए सबसे पहले हथियारों की खरीद, बिक्री और सुरक्षित रखरखाव से जुड़े नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। नाबालिगों की हथियारों तक पहुंच रोकने के लिए परिवारों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हथियारों की बिक्री से पहले आवश्यक जांच, जोखिम के संकेत मिलने पर समय रहते कार्रवाई और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं, उसका पालन सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सरकारों को इस विषय पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनसुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
 
विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए। प्रशिक्षित परामर्शदाता उपलब्ध हों, बच्चों के व्यवहार में गंभीर बदलाव या हिंसा की धमकियों को संवेदनशीलता से लिया जाए और परिवारों तथा विद्यालय प्रशासन के बीच संवाद मजबूत बनाया जाए। विद्यार्थियों को डराने या संदेह के आधार पर दंडित करने के बजाय उनकी समस्याओं को समझने की व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। विद्यालयों में आपातकालीन तैयारी, सुरक्षित निकासी और स्थानीय पुलिस तथा चिकित्सा सेवाओं के साथ समन्वय होना चाहिए। अभिभावकों को भी बच्चों के सामने हिंसा का महिमामंडन करने से बचना चाहिए।
 
समाज को यह समझना होगा कि हथियार अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं हैं। हथियारों का अनियंत्रित प्रसार भय और जोखिम बढ़ा सकता है। फिल्मों, मनोरंजन और सामाजिक व्यवहार में हिंसा को सामान्य या आकर्षक बनाकर प्रस्तुत करने के प्रभाव पर भी गंभीर चर्चा जरूरी है। बच्चों को संवाद, सहिष्णुता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और दूसरे के जीवन के सम्मान का महत्व सिखाना होगा। किसी किशोर में गंभीर संकट या हिंसक व्यवहार के संकेत दिखाई दें, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय योग्य विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।
 
अमेरिका में विद्यालयों पर होने वाले हमलों का अंत केवल सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने से नहीं होगा। इसके लिए जिम्मेदार हथियार नीति, सुरक्षित पारिवारिक वातावरण, प्रभावी कानून, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और संवेदनशील सामाजिक संस्कृति की आवश्यकता है। ओरेगन में मारे गए तीन बच्चों और शिक्षिका की मृत्यु पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है। विद्यालय ज्ञान, आशा और भविष्य निर्माण के केंद्र होते हैं, भय के नहीं। किसी भी देश की वास्तविक प्रगति तभी सार्थक है, जब उसके बच्चे बिना डर के पढ़ सकें, खेल सकें और अपने सपने पूरे कर सकें। गन कल्चर पर गंभीर पुनर्विचार और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आज समय की सबसे बड़ी मांग है।
 
कांतिलाल मांडोत

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