ऐतिहासिक रहा बाजार शुकुल का दशहरा मेला कई जनपदों से आए दर्शक

थानाध्यक्ष गजेंद्र प्रताप सिंह ने संभाली सुरक्षा की कमान, चप्पे-चप्पे पर तैनात रही पुलिस

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शुकुल बाजार, अमेठी। असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक विजयदशमी का पर्व शुकुल बाजार कस्बे में हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया।
 
इस अवसर पर रामलीला मैदान में भव्य दशहरा मेले का आयोजन किया गया, जहां रावण दहन के साथ रामलीला का मनमोहक मंचन हुआ। मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रवासी शामिल हुए प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विगत 20 वर्षों में इतनी ज्यादा भीड़ कभी भी मेले में नहीं उमडी जितनी भीड़ इस वर्ष मेले में आई।
 
पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।दशहरा पर्व के अवसर पर रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया गया। इसके बाद रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मैदान में पहुंचे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में मेले को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।वहीं, शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया गया। एक ओर प्रतिमा विसर्जन की धार्मिक गतिविधियां चल रही थीं, तो दूसरी ओर रामलीला का मंचन और विशाल दशहरा मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही थी। तीनों आयोजनों के एक साथ होने के बावजूद पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
 
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद रही पुलिस
 
दशहरा पर्व, रामलीला मंचन और प्रतिमा विसर्जन के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाध्यक्ष बाजार शुक्ल गजेंद्र प्रताप सिंह ने स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली। कस्बे के प्रमुख स्थानों, मेला परिसर और संवेदनशील स्थलों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। पुलिस बल लगातार निगरानी करता रहा, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
 
पुलिस की सतर्कता और मुस्तैदी के चलते दशहरा मेला, रावण दहन, रामलीला मंचन और प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। पर्व के दौरान क्षेत्र में आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की झलक देखने को मिली।विजयदशमी का पर्व एक बार फिर यह संदेश दे गया कि सत्य और धर्म का मार्ग अंततः विजय की ओर ले जाता है। शुकुल बाजार में आयोजित दशहरा उत्सव ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया।

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