एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त, ड्यूटी पर लौटे 800 से अधिक कर्मचारी
मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन खत्म, अनुपस्थिति पर कार्रवाई नहीं करने का भी मिला भरोसा; एक माह में मांगें पूरी नहीं होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी
कुशीनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का विगत छह अक्टूबर से चल रहा चरणबद्ध आंदोलन समाप्त हो गया है। शासन स्तर पर मांगों को लेकर लिखित आश्वासन मिलने के बाद शनिवार, 17 अक्टूबर से जिले के 800 से अधिक कर्मचारी अपने कार्यस्थलों पर लौट आए। इससे पिछले कई दिनों से प्रभावित स्वास्थ्य सेवाओं के फिर से सुचारू होने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर कर्मचारी समान कार्य-समान वेतन, कैडर निर्माण, नियमितीकरण, ईपीएफ, ईएसआई, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और स्थानांतरण नीति समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। छह अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर विरोध जताने के बाद आठ से 10 अक्टूबर तक जिला मुख्यालय पर कार्य बहिष्कार किया गया। इसके बाद 12 अक्टूबर से कर्मचारी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार कर लखनऊ के इको गार्डन में धरने पर बैठ गए थे।
आंदोलन के चलते जिले में टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) समेत एनएचएम से जुड़ी विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई थीं। कर्मचारियों की वापसी से मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
एमडी एनएचएम के साथ बैठक में बनी सहमति
संघ के प्रतिनिधियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों के बीच 14 अक्टूबर को मिशन निदेशक की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक का कार्यवृत्त जारी होने के बाद संगठन ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। इसमें कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया गया है।
प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये निर्धारित करने तथा कार्य, पद और योग्यता के आधार पर मूल वेतन तय करने के लिए वेतन नीति समिति का गठन शामिल है। इसके अलावा 20 प्रतिशत मकान किराया भत्ता (एचआरए), ईपीएफ, ग्रेच्युटी, बाल देखभाल अवकाश (सीसीएल), अर्जित अवकाश (ईएल), विशेष अवकाश और 10, 15 व 20 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस से जुड़े मामलों पर एचआर पॉलिसी रिव्यू समिति के माध्यम से कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
बैठक में कर्मचारियों और उनके परिवारों को 10 लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने, आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन तथा नर्स मेंटर और संपूर्णा क्लिनिक से सेवामुक्त कर्मचारियों की बहाली से संबंधित मुद्दों पर भी सहमति बनी। एनटीईपी के कर्मचारियों के मोबिलिटी भत्ते को फिक्स्ड यात्रा भत्ते के रूप में वेतन में शामिल करने का आश्वासन दिया गया है।
धरना अवधि की अनुपस्थिति पर नहीं होगी कार्रवाई
कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण आश्वासन धरना अवधि के दौरान अनुपस्थित रहने को लेकर मिला है। बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, आंदोलन समाप्त करने की निर्धारित शर्त के तहत धरना अवधि की अनुपस्थिति को लेकर किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस संबंध में सभी जनपदों को निर्देश जारी करने की बात कही गई है।
एक माह में मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर होगा आंदोलन
संघ के गोरखपुर मंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर यादव लड्डू ने कहा कि यह संगठन की एकता और कर्मचारियों के सहयोग की जीत है। शासन ने उनकी उचित मांगों पर सहमति जताते हुए लिखित कार्यवृत्त जारी किया है। उन्होंने इसके लिए मिशन निदेशक का आभार जताया। साथ ही चेतावनी दी कि एक माह के भीतर वेतन नीति और अन्य मांगों पर ठोस आदेश जारी नहीं हुए तो कर्मचारी दोबारा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
वहीं, कुशीनगर के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि कार्य बहिष्कार के कारण आम मरीजों को हुई परेशानी के लिए संगठन को खेद है, लेकिन मांगों को लेकर आंदोलन करना उनकी मजबूरी थी। उन्होंने बताया कि जिले के 800 से अधिक एनएचएम कर्मचारी शनिवार से पूरी निष्ठा के साथ ड्यूटी पर लौट आए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सामान्य रूप से संचालित हो सकेंगी।
जिलाध्यक्ष ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से मिशन निदेशक के निर्देशों के अनुरूप त्योहार से पहले कर्मचारियों का वेतन भुगतान कराने की मांग भी की गई है। संगठन ने सभी कर्मचारियों से अपने-अपने कार्यस्थलों पर उपस्थित रहकर मरीजों के हित में कार्य करने की अपील की है।


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