तोड़ के रख दो वो समाज, नारी जिसमें बंधी है आज
देशभर में बढ़ते स्त्री विरोधी अपराधों के खिलाफ आज पिंजरा तोड़ अभियान के बैनर तले दिशा छात्र संगठन और तमाम प्रगतिशील छात्र संगठन की ओर से फ्रीडम मार्च निकाला गया।
स्वतंत्र प्रभात।
ब्यूरो प्रयागराज
देशभर में बढ़ते स्त्री विरोधी अपराधों के खिलाफ आज पिंजरा तोड़ अभियान के बैनर तले दिशा छात्र संगठन और तमाम प्रगतिशील छात्र संगठन की ओर से फ्रीडम मार्च निकाला गया।
मार्च की शुरुआत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास से हुआ और उसके बाद केपीयूसी, बालसन चौराहा, इंडियन प्रेस चौराहा होते हुए आजाद प्रतिमा के सामने खत्म होगा। इस मार्च में हजारों की संख्या में छात्राएं छात्र और शहर के प्रगति नागरिक शामिल हुए।
सभा में बात रखते हुए स्त्री मुक्ति लीग की अंजलि ने कहा कि दिल्ली में हमारे बहादुर बहनों ने और बाद में बीएचयू के छात्राओं ने जिस तरह संगठित प्रतिरोध को जन्म दिया वह एक मिसाल है। यह प्रतिरोध सत्ताधारियों और उसकी सरपरस्ती में पलने वाले लम्पट तत्वों के मुंह पर एक करारा तमाचा है। जो लड़कियों के साथ होने वाले अपराधों के लिए स्त्रियों को ही संस्कार और चरित्र का पाठ पढ़ाते हैं।
अंजलि ने आगे कहा की स्त्रियों के खिलाफ होने वाले अपराध के बाद तमाम पूंजीवादी पार्टियों और निम्नस्तरीय पंच लाइन की चाशनी में डुबोकर चमकोवाद और चनाजोर गरम की राजनीति करने वाले संगठन रस्मी तौर पर कुछ प्रदर्शनों और जुलूसों तक अपने संघर्ष को समेट कर पूरी लड़ाई कोई चुनावी हार-जीत की लड़ाई में समेत देते हैं। महिला सशक्तिकरण के तमाम जुमलो और चमकोवाद के तमाम बकवासों के बावजूद सच्चाई यह है कि पिछले कुछ महीनो में स्त्रियों के खिलाफ होने वाले बर्बाद अपराधों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। यह अपराध दिन-ब-दिन हिंसक होते जा रहे हैं। समाज में ऐसा घटाटोप छाया हुआ है जहां स्त्रियों का खुलकर सांस ले पाना मुश्किल होता जा रहा है। बलात्कार और उसके बाद खौफनाक हत्याएं, तेजाब फेंकने जैसी घटनाएं आम हो गई है। जमुई, समस्तीपुर, दिल्ली, कठुआ, उन्नाव, हाथरस, आरजीकर मेडिकल कॉलेज आदि जगहों पर हुई घटनाएं इसका उदाहरण हैं राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में कल 470000 से अधिक स्त्री विरोधी अपराध सामने आये है। यह वे मामले जो किसी तरह पुलिस के रिकॉर्ड में आ जाते हैं। इससे कई गुना ज्यादा मामले ऐसे होते हैं जो लोक लाज की डर से पुलिस स्टेशन पर नहीं पहुंच पाते है। आमतौर पर स्त्री विरोधी अपराधों का ठीकरा उल्टा स्त्रियों पर फोड़ दिया जाता है। हमारे देश में या बहुत प्रचलित तर्क है कि स्त्री अपराधों के लिए लड़कियों के पहनावे, मोबाइल और आधुनिकता जिम्मेदार है। लेकिन वास्तविकता यह है कि बलात्कार के आरोपियों में 96.5 प्रतिशत अपराधी पीड़िता के जानकारी यानी नजदीकी रिश्तेदार, पड़ोसी और कार्यस्थल पर पाए गए है। इतना ही नहीं राजनीतिक लाभ और सांप्रदायिक फासीवादी राजनीति के फायदे के लिए सत्ताधारों द्वारा बलात्कारी का समर्थन जाति धर्म के आधार पर ऐसे मामलों में अपराधियों के बचाव में उतारने का घातक ट्रेंड शुरू हो चुका है।अभी हाल ही में बिलकिस बानो कांड के अपराधियों की रिहाई और लखीमपुर खीरी, उन्नाव, कठुआ के अपराधियों के पक्ष में खड़े होने जैसी घटनाओं की कल्पना किसी सभ्य इंसानी समाज में नहीं की जा सकती है।
दिशा छात्र संगठन की अवनी ने कहा कि आज के कठिन दौर में स्त्री मुक्ति आंदोलन के सामने बहुत गंभीर चुनौतियां हैं। पहले भारतीय समाज में पुराने मूल्य मान्यताओं की जकड़बंदी आज भी बनी हुई है। जिस तरह पेशा, पोशाक, जीवनसाथी जैसे निहायत व्यक्तिक मामलों में भी स्त्रियां स्वतंत्र नहीं है। इस पृष्ठभूमि पर तमाम धार्मिक कट्टरपंथी तमाम रूढ़िवादी ताकतें स्त्रियों की स्वतंत्रता, सामाजिक राजनीतिक भागीदारी, अपने जीवन के मामले में खुद फैसला लेने की कोशिश रूढ़िवादी कट्टरपंथी तत्वों को बर्दाश्त नहीं होती है। इस तरह चुनाव के दौरान एंटी रोमियो स्क्वायड बनाने की घिनौनी कोशिश वास्तव में स्त्रियों के अपने जीवन के बारे में खुद फैसला लेने की थोड़ी बहुत आजादी को भी छीन लेने की घटिया कोशिश है। स्त्री के संदर्भ में जहां एक और पुराने पितृसत्तात्मक रीति रिवाज के निरंतरता है वहीं दूसरी ओर कॉरपोरेट मीडिया द्वारा नई विकृतियों की बाढ़ लगा दी गई है। लूट और मुनाफे पर टिकी मौजूदा व्यवस्था ने सेक्स खिलौने, सेक्स पर्यटन, वेश्यावृत्ति के नए रूपों, विकृत सेक्स, बाल वेश्यावृत्ति, पोर्न फिल्मों- विज्ञापनों आदि का कई हजार खराब डॉलर का एक भूमंडलीय बाजार तैयार किया है। सामान्य मध्यवर्गी घरों के किशोर व युवाओं तक नशीली दवाओं और पोर्न फिल्मों की पहुँच बहुत बड़े पैमाने पर हो गई है। यही नहीं मजदूर बस्तियों में भी पोर्न फिल्मों का एक बड़ा बाजार तैयार हुआ है। सहज ही समझा जा सकता है कि किस तरह मौजूदा व्यवस्था हर सेकंड स्त्री विरोधी मानसिकता को तेजी से जन्म देती रही है।
ऐसे में हमें संगठित प्रयास से समाज का पुनर्गठन करना होगा।
प्रदर्शन में सौम्या, पूजा, सुहानी, विधि, आरती, सुरभि, अंजना, समेत हजारों लोग शामिल रहे।
#SwatantraPrabhat #Prayagraj #IndiaNews #WomenEmpowerment #UttarPradeshNews #WomenSafety #PrayagrajNews #SocialJustice #WomenRights #StudentProtest #DishaStudentOrganization #CrimeAgainstWomen #AllahabadUniversity #GenderViolence #StopViolenceAgainstWomen #WomensMovement #FreedomMarch #StudentOrganizations #PinjraTod #GenderEquality #RapeCases #WomenJustice #FeministMovement #CivilRights #YouthProtest


Comments