धमकी और सोशल मीडिया की छींटाकशी से नहीं झुकूंगा, सार्वजनिक पार्क की लड़ाई जारी रहेगी : प्रकाश वीर आर्य

गोविंद नगर ब्लॉक-8 पार्क प्रकरण में सामाजिक कार्यकर्ता ने लगाया दबाव बनाने का आरोप, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन की मांग

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कानपुर। गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एवं भाजपा साहित्य प्रचार विभाग, कानपुर दक्षिण जिले के संयोजक प्रकाश वीर आर्य ने दावा किया है कि उन्हें फोन कॉल के जरिए धमकाया जा रहा है और सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित कर उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। आर्य ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के दबाव से वह अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे और सार्वजनिक पार्क की भूमि तथा न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
 
आर्य ने कहा कि उनके खिलाफ मंदिर तोड़ने और पार्क पर कब्जा करने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाने वालों से इन दावों के प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि आरोप-प्रत्यारोप से तथ्य नहीं बदलते और विवाद का वास्तविक स्वरूप सरकारी अभिलेखों तथा न्यायालय के आदेश से ही स्पष्ट होगा।
 
मंदिर के संचालन को लेकर भी उठाए सवाल
 
सामाजिक कार्यकर्ता ने मंदिर के संचालन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंदिर के पुजारी शिवांग गुप्ता पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय लोगों को पूजा-अर्चना में परेशानी होने तथा महिलाओं सहित करीब 50 लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। आर्य ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए जाने की मांग की।
 
उन्होंने कहा कि वह किसी मंदिर में पूजा-अर्चना के विरोधी नहीं हैं। उनका मुद्दा सार्वजनिक पार्क की भूमि के वैधानिक उपयोग और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक भूमि पर किसी संरचना को लेकर उत्पन्न विवाद का समाधान कानून और न्यायालय के आदेश के अनुसार होना चाहिए।
 
हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
 
आर्य ने बताया कि मामला WPIL No. 1023/2026 में 22 अप्रैल 2026 को पारित इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से संबंधित है। उन्होंने यह भी कहा कि आदेश के अनुपालन को लेकर Contempt Application (Civil) No. 4779/2026 की कार्यवाही भी न्यायालय के समक्ष आई है। उनका कहना है कि ऐसे में सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के जरिए आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय संबंधित पक्षों को न्यायालय के आदेश और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रखना चाहिए।
 
रामजन्मभूमि आंदोलन का भी किया उल्लेख
 
प्रकाश वीर आर्य ने अपने पुराने सामाजिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने सक्रिय भागीदारी की थी और उस समय उन पर रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई हुई थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में वह फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बजरंग दल के तत्कालीन अध्यक्ष हरी दीक्षित के साथ बंद रहे थे।
 
उन्होंने कहा कि उनकी धार्मिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने वालों को अपने अतीत की भूमिका भी सार्वजनिक करनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा विवाद को धार्मिक या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाने के बजाय सार्वजनिक पार्क की भूमि और न्यायालय के आदेश के अनुपालन तक सीमित रखा जाना चाहिए।
 
संयुक्त निरीक्षण और अभिलेखों की जांच की मांग
 
आर्य ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले में स्थल का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, सरकारी अभिलेखों की जांच की जाए और हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ धमकी, आपत्तिजनक अथवा मानहानिकारक सामग्री का प्रसारण जारी रहा तो वह कॉल रिकॉर्ड, वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री सुरक्षित रखकर उचित वैधानिक कार्रवाई करेंगे।
 
उन्होंने दोहराया कि “मेरा विरोध किसी मंदिर या सनातन धर्म से नहीं, बल्कि सार्वजनिक पार्क की भूमि के वैधानिक उपयोग और न्यायालय के आदेश के पालन से जुड़े सवालों से है।

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