रामादेवी पुल के नीचे सनिगवां रोड पर‘गड्ढों का जाल’, रोज हजारों राहगीरों की जान जोखिम में

पिछले साल बनी सड़क वर्षांत में हुई बदहाल, ई-रिक्शा व दोपहिया सवार आए दिन हो रहे चोटिल; प्रशासन बेखबर

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---------------- जितेन्द्र सिंह 
 
कानपुर।
 
रामादेवी पुल के नीचे सनिगवां रोड पर इन दिनों सड़क की बदहाली राहगीरों के लिए मुसीबत बन गई है। नौबस्ता की ओर से सनिगवां रोड जाने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालकों को हर कदम पर दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन सवार आए दिन इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
 
बताया जाता है कि इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 25 से 30 हजार लोग आवागमन करते हैं। भाभा नगर, सावित्री नगर, हाईवे सिटी, चंद्रनगरी, स्वर्ण जयंती विहार, सनिगवां, कुरियां, पिपरगंवा और गदियाना समेत कई इलाकों के लोगों के लिए यह रास्ता रामादेवी की ओर आने-जाने का प्रमुख मार्ग है। इसके अलावा पीएसी क्षेत्र के लोगों का आवागमन भी इसी रास्ते से होता है।
 
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क का निर्माण पिछले वर्ष ही कराया गया था, लेकिन बरसात और वर्षांत के दौरान सड़क की हालत तेजी से बिगड़ती चली गई। अब जगह-जगह बने गहरे गड्ढे सड़क निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रहे हैं। रात के समय स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है, क्योंकि कई गड्ढे दूर से दिखाई नहीं देते।
एक गड्ढा, कई सवाल
 
राहगीरों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग की नजर इस प्रमुख मार्ग की बदहाली पर अब तक नहीं पड़ी है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि समय रहते गड्ढों की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों ने सड़क की तत्काल मरम्मत कराने, गड्ढों को भरने और सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
 
लोगों का सवाल है कि जब रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही वाले मार्ग की सड़क पिछले साल ही बनी थी तो महज कुछ समय में उसमें इतने बड़े गड्ढे कैसे हो गए? क्या सड़क निर्माण के बाद उसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन की जांच की गई थी? यदि नहीं, तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
 
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि रामादेवी पुल के नीचे सनिगवां रोड का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराकर गड्ढों को भरवाया जाए, ताकि रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लोगों को दुर्घटना के खतरे से राहत मिल सके।

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