रमनातौफीर गौशाला में गोवंशों की दुर्दशा पर भाजपा नेता ने उठाए सवाल

गौवंश के के चारा घोटाले को लेकर जिम्मेदार अधिकारी पर सवाल खड़ा हो रहा है गौशाला में मर रहे गौ वंश घोटाले का पाप अधिकारियों पर भी लगेगा मामला रमना तौफीक का है दबंग प्रधान है वहां का

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बस्ती। जिले के दुबौलिया ब्लॉक क्षेत्र में स्थित वृहद गौ संरक्षण केंद्र रमना तौफीक में गौ बंशो की बदहाली पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा गौशाला का निरीक्षण के दौरान बदहाली देखकर अपनी ही पार्टी की सरकार के जिम्मेदारों पर हमलावर होते हुए कहा कि गौशाला में संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रधान, क्षेत्र पंचायत एवं संबंधित स्थानीय निकायों की होती है लेकिन गौशाला की नियमित जांच, निगरानी, पशुओं के स्वास्थ्य और उपलब्ध संसाधनों के सदुपयोग की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भी है।बीडीओ, सीडीओ, एसडीएम, जिलाधिकारी तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी धन से संचालित गौशालाओं में गौवंश भूख, बीमारी और उपेक्षा से न मरें।

जिलाधिकारी को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने कई घंटे बीतने के बाद भी यदि गौशाला की स्थिति जानने तत्काल राहत पहुंचाने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं करते है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कर क्या रहे हैं?

उन्होंने कहा कि गौशाला के गेट पर ही गौवंश मरणासन्न अवस्था में और कुछ पशु मृत मिलें तथा कुछ जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हों, तो इसे सामान्य प्रशासनिक लापरवाही मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। गौवंश संरक्षण केवल भाषणों और सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि जमीन पर संवेदनशीलता और जवाबदेही का विषय है ।

उन्होंने पशु चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गौशालाओं में पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, समय पर उपचार, दवा, चारा और साफ-सफाई सुनिश्चित करना अनिवार्य है। बीमार पशु के उपचार में देरी अंततः उसकी जान पर भारी पड़ सकती है।

सुदामाजी ने चेतावनी दी कि यदि निरीक्षण में सामने आई बदहाली पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई और गौवंशों की स्थिति यथावत रही तो वे इस विषय को लेकर प्रशासन के समक्ष मजबूती से आवाज उठाएंगे और जनहित में आर-पार की लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गौशाला का तत्काल पुनः निरीक्षण कराया जाए, मृत एवं मरणासन्न गौवंश की स्थिति की जांच हो, बीमार पशुओं का तत्काल उपचार कराया जाए, चारा-पानी एवं साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाय । इस सम्बन्ध में प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी, चिलमाबाजार डा0 ए के गौड ने बताया कि उक्त गौशाला में चिकित्सा टीम बराबर जा रही है।उन्होंने बुधवार को स्वयं गौशाला में पहुंच कर पशुओ का उपचार करने की पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक उक्त गौशाला की असली समस्या यह है कि निर्माण के समय जिम्मेदारों ने गौशाला का निर्माण लो लैंड में कर दिया। सामान्य जमीन के लेबल से नीचे होने के कारण बरसात में गौशाला में पानी भर जाता है। ऊपर से पर्याप्त शेड के अभाव में पशुओं के बैठने और बरसात से बचाव की व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण बरसात में पशु भीगकर बीमार हो जाते हैं जिस कारण पशुओं की मौत असमय हो रही है।


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