छह सूत्रीय मांगों को लेकर सहकारी सचिवों ने शुरू की कलमबंद हड़ताल

स्वास्थ्य सुरक्षा, सरकारी ढांचे में समावेश समेत छह सूत्रीय मांगों को लेकर सहकारी सचिवों और कर्मचारियों ने गुरुवार से प्रदेशव्यापी कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी।

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सितारगंज। स्वास्थ्य सुरक्षा, सरकारी ढांचे में समावेश समेत छह सूत्रीय मांगों को लेकर सहकारी सचिवों और कर्मचारियों ने गुरुवार से प्रदेशव्यापी कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर कार्य बहिष्कार किया और सहकारी समिति कार्यालय में धरना देकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

पैक्स सचिव एवं कर्मचारी संयुक्त संगठन के आह्वान पर आयोजित धरने में सहकारी समितियों से जुड़े सचिव और कर्मचारी शामिल हुए। सहकारी सचिव शुभम त्यागी ने बताया कि संगठन की ओर से 18 सितंबर से ही विभिन्न सूचनाओं, बैठकों, मेलों और कैंपों का बहिष्कार किया जा रहा था। मांगों का समाधान नहीं होने पर अब एक अक्टूबर से प्रदेशभर में कलमबंद हड़ताल शुरू की गई है।

उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से पांच अक्टूबर को निबंधक कार्यालय, देहरादून में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और हड़ताल शुरू करने की योजना है। कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से उनकी विभिन्न मांगें लंबित हैं, लेकिन शासन स्तर से समाधान के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

सहकारी सचिवों ने समान कार्य और व्यवसाय में सम्मिलित एम-पैक्स का पंजीकरण निरस्त करने की मांग उठाई। इसके साथ ही मिनी बैंकों में जमा धनराशि के संरक्षण तथा वितरित ऋण की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना है कि सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं, इसलिए सचिवों और कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने प्रदेश के सभी पैक्स सचिवों और कर्मचारियों को सहकारिता के दायरे में शामिल करने तथा राज्य स्वास्थ्य योजना और गोल्डन कार्ड का लाभ देने की मांग भी उठाई। इसके अलावा कैडर फंड, ग्रेड वेतन, नियमित अनुदान और वेतन विसंगति समेत लंबित मांगों पर शासनादेश जारी करने की मांग की गई।

कर्मचारियों ने पदोन्नति, वेतनमान, भविष्य निधि और सेवानिवृत्ति देयकों के निर्धारण की उचित व्यवस्था किए जाने की भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि मांगों के समाधान को लेकर कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा चुका है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पांच अक्टूबर से देहरादून में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन के बाद आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दी गई।

धरने में अंकित बड़ोला, ममता अधिकारी, मलिक, बसंत सिंह, दीप सिंह राणा समेत अन्य सहकारी सचिव एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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