सड़क हादसे में घायल अमन को इलाज के साथ गृहस्थी चलाने की भी चिंता

.........दो महीने कोमा में रहने के बाद आया होश, अब न चल पा रहा न बोल पा रहा; परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा

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मोहनलालगंज। पीजीआई के वृंदावन योजना, रायबरेली रोड तेलीबाग निवासी अमन शुक्ला के परिवार पर सड़क हादसे के बाद मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। नौ मई 2026 को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल अमन करीब दो महीने तक कोमा में रहा। अब होश में आने के बाद भी वह न तो ठीक से किसी को पहचान पा रहा है और न ही चल-बोल पा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, उसके पूरी तरह स्वस्थ होने में एक से दो साल तक का समय लग सकता है।
 
अमन परिवार का इकलौता कमाने वाला बेटा था। वह पंडिताई कर माता-पिता और दो छोटी बहनों का खर्च चलाता था। हादसे के बाद परिवार के सामने इलाज के साथ रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है। पिता विनीत शुक्ला निजी गाड़ी चलाते हैं, जबकि मां ममता शुक्ला लोगों के घरों में खाना बनाने का काम करती थीं। बेटे की गंभीर हालत के चलते वह भी अब काम पर नहीं जा पा रही हैं।
 
परिवार के मुताबिक, जिन घरों में ममता काम करती थीं, वहां के लोग भी परिवार की मदद कर रहे हैं, लेकिन अमन के लंबे इलाज, दवाओं और देखभाल के खर्च के साथ घर का किराया और अन्य जरूरी खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है।
 
अमन की दो छोटी बहनें वैष्णवी (15) और अर्पिता (6) हैं। परिवार के सामने एक ओर अमन के इलाज का लगातार बढ़ता खर्च है तो दूसरी ओर गृहस्थी चलाने की जिम्मेदारी भी है। परिजनों ने सक्षम लोगों से अमन के इलाज में आर्थिक सहयोग की अपील की है।
 
परिजनों का कहना है कि अमन को अभी लंबे समय तक इलाज और निरंतर देखभाल की जरूरत है। ऐसे में लोगों की छोटी-सी आर्थिक मदद भी अमन के इलाज और परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है।

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