श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद में डिजिटल क्रिएटर ग्रुप ने कराया सुजय दास का अंतिम संस्कार

बेबसी के अंधेरे में मानवता की रोशनी

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श्रीभूमि- कहते हैं कि इंसानियत की असली पहचान कठिन समय में होती है। जब किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देना भी मुश्किल हो जाए, तब मदद के लिए बढ़ा एक हाथ मानवता की सबसे बड़ी मिसाल बन जाता है। श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद में ऐसी ही एक घटना सामने आई, जहां आर्थिक संकट से जूझ रहे एक परिवार की मदद के लिए सनबिल डिजिटल क्रिएटर ग्रुप के सदस्य आगे आए। श्रीभूमि जिले के सोनबील दरगारबंद निवासी सुजय दास लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के बाद वह काफी समय से बिस्तर पर थे।
 
तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने जीवन के संघर्ष को जारी रखा। लेकिन आखिरकार गत 16 जुलाई की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। सुजय दास के निधन के बाद परिवार के सामने एक नई परेशानी खड़ी हो गई। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना संभव नहीं हो पा रहा था। परिजनों के अनुसार, सहायता के लिए कई जगहों पर संपर्क किया गया, लेकिन समय पर कोई प्रभावी सहयोग नहीं मिल सका।
 
इस कारण उनका पार्थिव शरीर रातभर घर में ही रखा रहा। इसी दौरान सुजय दास की पुत्री की सहायता की अपील सोनबील डिजिटल क्रिएटर ग्रुप के सदस्यों तक पहुंची। सूचना मिलते ही ग्रुप के सदस्य और कुछ स्थानीय संवेदनशील लोग तुरंत परिवार के पास पहुंचे और अंतिम संस्कार की व्यवस्था में जुट गए। ग्रुप के सदस्यों ने आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हुए सुजय दास को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 
हालांकि इस घटना ने समाज के सामने एक गंभीर सवाल भी खड़ा किया। जहां कुछ लोगों ने आगे बढ़कर मानवता का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर यह भी देखने को मिला कि इस कठिन समय में गांव के अधिकांश लोग परिवार की सहायता के लिए आगे नहीं आए। केवल कुछ वरिष्ठ नागरिकों और संवेदनशील लोगों ने ही परिवार का साथ दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में जब सामाजिक संवेदनाएं कमजोर होती दिखाई दे रही हैं, ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं।
 
सोनबील डिजिटल क्रिएटर ग्रुप की पहल ने यह साबित किया कि सोशल मीडिया केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता का प्रभावी जरिया भी बन सकता है। किसी व्यक्ति को मृत्यु के बाद सम्मानजनक विदाई मिलना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। दरगारबंद की यह घटना हमें मानवता, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व याद दिलाती है।“मानवता की खूबसूरती तब और बढ़ जाती है, जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के किसी असहाय के साथ खड़ा होता है।

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