राम मंदिर में सीईओ, क्या रुकेगा भ्रष्टाचार

धार्मिक विषयों का निर्णय मंदिर ट्रस्ट और संत समाज के मार्गदर्शन में ही होना चाहिए

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहींबल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंदिर के निर्माण के बाद यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और चढ़ावेदानव्यवस्थाओं तथा प्रशासन का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मंदिर के सुचारु संचालन के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे आधुनिक और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैंजबकि कुछ लोग इसे पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था में प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल सीईओ की नियुक्ति से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकेगामंदिर प्रशासन की बदलती जरूरत- राम मंदिर आज एक विशाल संस्थान का स्वरूप ले चुका है। यहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का आगमनसुरक्षादर्शन व्यवस्थादान का प्रबंधननिर्माण कार्यकर्मचारियों का संचालनस्वच्छता और भविष्य की योजनाएं जैसे अनेक कार्य हैं। इन सबका संचालन केवल पारंपरिक व्यवस्था से करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में एक पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता महसूस की गई। सीईओ का दायित्व होगा कि मंदिर की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया जाएवित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाए और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।

क्या केवल सीईओ भ्रष्टाचार रोक सकता है?

इस प्रश्न का सीधा उत्तर है—नहीं। किसी भी संस्था में भ्रष्टाचार केवल व्यक्ति बदलने से समाप्त नहीं होता। इसके लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता होती है। यदि वित्तीय लेन-देन पारदर्शी न होऑडिट नियमित न होनिर्णय प्रक्रिया स्पष्ट न हो और जवाबदेही तय न होतो किसी भी पद पर बैठा अधिकारी भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता। सीईओ व्यवस्था को बेहतर बना सकता हैलेकिन भ्रष्टाचार रोकने के लिए कई अन्य कदम भी जरूरी होंगे। पारदर्शिता सबसे बड़ा हथियार- किसी भी धार्मिक संस्था में श्रद्धालुओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होता है। इसलिए यह आवश्यक है कि— दान और चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक हो। नियमित स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। खरीद और ठेकों की प्रक्रिया पारदर्शी हो।

बच्चों की चहकती ज़िंदगी पर पड़ रहा विकास का काला साया Read More बच्चों की चहकती ज़िंदगी पर पड़ रहा विकास का काला साया

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जाए।

हर बच्चा भविष्य का पृष्ठ : लेकिन हम पन्ने भर रहे हैं या लिख रहे हैं? Read More हर बच्चा भविष्य का पृष्ठ : लेकिन हम पन्ने भर रहे हैं या लिख रहे हैं?

शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था हो। यदि ये व्यवस्थाएं लागू होती हैंतो भ्रष्टाचार की संभावनाएं स्वतः कम होंगी। देश के अन्य मंदिरों से सीख- भारत के कई बड़े मंदिरों में पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था पहले से लागू है। वहां आईएएस अधिकारियों या अनुभवी प्रशासकों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं। इससे व्यवस्था में सुधार हुआ हैलेकिन जहां निगरानी कमजोर रहीवहां विवाद भी सामने आए। इससे स्पष्ट होता है कि केवल प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति पर्याप्त नहीं होतीबल्कि पूरी प्रणाली को पारदर्शी बनाना आवश्यक है। आधुनिक प्रबंधन और धार्मिक परंपरा का संतुलन राम मंदिर केवल एक प्रशासनिक संस्था नहींबल्कि धार्मिक आस्था का केंद्र है। इसलिए यह भी जरूरी है कि आधुनिक प्रबंधन लागू करते समय धार्मिक परंपराओं और मंदिर की गरिमा का पूरा सम्मान बना रहे। सीईओ का कार्य धार्मिक निर्णय लेना नहींबल्कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना होना चाहिए। धार्मिक विषयों का निर्णय मंदिर ट्रस्ट और संत समाज के मार्गदर्शन में ही होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और न्याय की संवेदना Read More सुप्रीम कोर्ट की गरिमा और न्याय की संवेदना

श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि- मंदिर में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु यह विश्वास लेकर आता है कि उसका दान धर्म और समाज के हित में उपयोग होगा। यदि वित्तीय पारदर्शिता मजबूत होगी तो श्रद्धालुओं का विश्वास और बढ़ेगा। इसके विपरीत यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसका असर केवल मंदिर प्रशासन पर नहींबल्कि समाज की भावनाओं पर भी पड़ सकता है। जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी- सीईओ की नियुक्ति तभी प्रभावी होगी जब उसके कार्यों की नियमित समीक्षा हो। ट्रस्टस्वतंत्र ऑडिट एजेंसियां और निर्धारित नियम मिलकर जवाबदेही सुनिश्चित करें। किसी भी बड़े संस्थान में "चेक एंड बैलेंस" की व्यवस्था ही भ्रष्टाचार रोकने का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है।

राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति को आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इससे कार्यों में पेशेवर दक्षताबेहतर समन्वय और पारदर्शिता आने की संभावना है। लेकिन यह मान लेना कि केवल सीईओ की नियुक्ति से भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जाएगाव्यावहारिक नहीं होगा। भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है जब पारदर्शी वित्तीय प्रणालीनियमित ऑडिटस्पष्ट जवाबदेहीडिजिटल प्रबंधन और स्वतंत्र निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी समान रूप से मजबूत हों। अंततः किसी भी धार्मिक संस्था की सबसे बड़ी ताकत श्रद्धालुओं का विश्वास होता हैऔर उस विश्वास की रक्षा केवल एक पद नहींबल्कि मजबूत और ईमानदार संस्थागत व्यवस्था ही कर सकती है।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें