बांदा में चकबंदी प्रक्रिया के खिलाफ किसानों का उग्र आंदोलन

दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी

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बांदा। जनपद बांदा में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेतृत्व में किसानों ने चकबंदी विभाग में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और फर्जी रिपोर्टों के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किसान जवाहर भवन-इंदिरा भवन परिसर में दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन धरने पर डटे रहे। जेडीयू की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल के नेतृत्व में चकबंदी आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम अमलीकोर सहित कई गांवों में चक सीमांकन का कार्य पूर्ण किए बिना ही शासन को कार्य पूरा होने की सूचना भेज दी गई। किसानों का कहना है कि मौके पर केवल लगभग 40 प्रतिशत कार्य ही हुआ है, जबकि विभागीय अभिलेखों में इसे पूर्ण दर्शाया गया है।
 
ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। किसानों ने यह भी मांग उठाई कि पहले से गठित जांच समितियों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। धरने पर बैठे किसानों का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है और किसानों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि पारदर्शिता और निष्पक्षता के अभाव में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
 
धरने में राघवेंद्र सिंह, अर्पित सिंह, अवधेश तिवारी, राहुल द्विवेदी, नवरत्न सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल रहे। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा क्रमिक अनशन और अन्य लोकतांत्रिक विरोध कार्यक्रम जारी रहेंगे। अब सभी की निगाहें प्रशासन और चकबंदी विभाग पर टिकी हैं कि किसानों की इन गंभीर शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है और उनकी मांगों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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