लखनऊ नगर निगम में बड़ा खेल ? जोनल अधिकारियों पर निजी ऑपरेटरों के जरिए राजस्व व्यवस्था प्रभावित करने के गंभीर आरोप

विभागीय नियमों, डेटा सुरक्षा और राजस्व प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

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विपिन शुक्ला लखनऊ।

राजधानी के नगर निगम में कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ जोनों में अधिकृत कर्मचारियों की बजाय निजी अथवा कार्यदायी संस्था से जुड़े कर्मियों से कंप्यूटर पर राजस्व संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे विभागीय नियमों, डेटा सुरक्षा और राजस्व प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसके माध्यम से कर निर्धारण, बिलिंग, डेटा फीडिंग और राजस्व से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों का संचालन होता है। ऐसे कार्य सामान्यतः अधिकृत कर्मचारियों द्वारा किए जाने चाहिए।

जोन-3 को लेकर भी सवाल

सूत्रों का दावा है कि जोन-3 में कंप्यूटर फीडिंग का दायित्व लिपिक राजीव जैन को सौंपा गया है। हालांकि, यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि उन्हें इस कार्य का पर्याप्त तकनीकी अनुभव नहीं है। इसी कारण एक कार्यदायी संस्था का कर्मचारी कथित तौर पर महत्वपूर्ण कंप्यूटर प्रणाली पर बैठकर काम कर रहा है। यदि ऐसा है, तो यह विभागीय प्रक्रिया और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े करता है।

नियमों के पालन पर उठे सवाल

जानकारों का कहना है कि यदि पूरे नगर निगम के सभी जोनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई स्थानों पर ऐसे निजी या बाहरी कर्मियों के कार्य करने की स्थिति सामने आ सकती है। इससे राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होने की आशंका है।

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जांच की उठी मांग

इस पूरे मामले में नगर निगम के अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि यदि किसी बाहरी व्यक्ति से राजस्व संबंधी कार्य कराया जा रहा है, तो उसकी अनुमति किस स्तर से दी गई और उसकी जवाबदेही किसकी होगी।

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