राजकीय नलकूप बेपानी,कैसे हो किसानी

इस समय धान की रोपाई अपने चरम सीमा पर है। क्षेत्र में लगाए गए तिरसठ राजकीय नलकूप बेपानी हो गए हैं। कुछ  नलकूपों को छोड़ दिया जाए।

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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता
 
लोटन (सिद्धार्थनगर)। इस समय धान की रोपाई अपने चरम सीमा पर है। क्षेत्र में लगाए गए तिरसठ राजकीय नलकूप बेपानी हो गए हैं। कुछ  नलकूपों को छोड़ दिया जाए।तो सब के सब किन्हीं न किन्हीं कारणों से बेकार पड़े हैं। जबकि जिम्मेदार लोगों को उक्त नलकूपों की दशा ठीक कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई दे रही है।
 
उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थनगर जनपद का पूर्वी छोर जो महराजगंज की सीमा से सटा है।  दोआबा  क्षेत्र के पिछड़े पन को दूर करने के लिए  तिरसठ राजकीय नलकूप लगवाए गए थे।
 
जिससे किसानों को खेती, किसानी में पानी की किल्लत न हो। लेकिन वर्तमान समय में उक्त नलकूपों से कोई लाभ आम किसानों को मिलता हुआ नहीं दिख रहा है।जिस समय नलकूप लगाए जा रहे थे।
 
उस समय किसानों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लोगों को लगा कि अब तो हर खेत को पानी मिलता रहेगा।इसके साथ ही क्षेत्र के तमाम लोगों को ट्यूबवेल आपरेटर के रूप में नौकरी भी मिल गई।
 
जिससे उनके परिवार में अत्यधिक खुशी बनी रही। लोगों की मानें तो लगभग एक दशक तक किसानों को पानी मिलता रहा।इसके बाद धीरे-धीरे नलकूपों की दशा खराब होती गई।
 
1997 में  प्रदेश सरकार ने सभी  ट्यूबल आपरेटरों को विकास विभाग में जोड़ दिया। लिहाजा ट्यूबवेल की दशा अब और खराब होने लगी। हालांकि एक पंचवर्षीय के बाद पुनः सभी आपरेटर्स को उनके मूल तैनाती वाले ट्यूबवेल पर लगा दिया गया।तब,तक बहुत देर हो चुकी थी।
 
रखरखाव के अभाव में पाइप लाइनों में रिसाव,टूटे,फूटे आवलेट, बिजली तार,पोल एंव ट्रांसफार्मर कुछ को छोड़ सब बेकार हो गए थे।किसी पानी के लिए परेशान होकर निजी पम्प सेट पर आश्रित होने लगे। जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी भी कई बार क्षेत्रीय लोगों ने दिया। लेकिन आज तक उसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
 
अब,जब खरीफ एवं रबी सीजन में खेती,किसानी करनी होती है।तो किसानों को अपने निजी पम्प सेट का ही सहारा है।जोकि इस भीषण मंहगाई में किसानों के लिए समस्या बनी हुई है।
 
क्षेत्रीय रामचरन मौर्य, गोपाल वर्मा, धनीराम, कृष्ण कुमार, रामरेखा,पियारे,ठग्गंन, सिपाही, रामप्रसाद,कोमल, द्वारिका,मेढ़ई,कदम, जाकिर आदि लोगों ने जिम्मेदार लोगों से क्षेत्र में लगे राजकीय नलकूप की दशा ठीक कराने की मांग की है। जिससे किसानों को खेती, किसानी में पानी का अभाव न हो।
 
 

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