कर्ज माफी से रोजगार तक… बेतिया में किसानों-खेत मजदूरों का उबाल

सरकार के खिलाफ गरजा जनआक्रोश

BIHAR SWATANTRA PRABHAT Picture
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बेतिया। 25 मई, सोमवार को राज्यव्यापी आह्वान के तहत किसानों, खेत मजदूरों और नौजवानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। बिहार राज्य किसान सभा, बिहार state खेत मजदूर यूनियन और आल इंडिया यूथ फेडरेशन के संयुक्त बैनर तले पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय में विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। प्रदर्शन की शुरुआत बेतिया के बलिराम भवन से हुई, जहां बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, नौजवान और सामाजिक कार्यकर्ता जुटे। हाथों में झंडे-बैनर और सरकार विरोधी नारों के साथ प्रदर्शनकारी शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए जिला समाहरणालय गेट पहुंचे, जहां यह प्रदर्शन एक विशाल सभा में तब्दील हो गया।

प्रदर्शन के दौरान किसानों और मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और किसानों की बदहाल स्थिति ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। किसानों ने सभी प्रकार के कृषि ऋण माफ करने, फसलों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने तथा गेहूं की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसानों को लागत का उचित मूल्य नहीं मिलने से वे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है।

सभा में मौजूद नौजवानों ने प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं पर भी तीखा आक्रोश जताया। वक्ताओं ने कहा कि लगातार पेपर लीक होने से युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है और सरकार इस पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। साथ ही बेरोजगारी पर नियंत्रण और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था करने की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई।

मनरेगा योजना को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सरकार को घेरा। उनका कहना था कि मनरेगा में लगातार फेरबदल कर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने साल में 200 दिन काम और सम्मानजनक मजदूरी देने की मांग की। गरीबों और मजदूरों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उजाड़ने का भी विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने रेहड़ी-पटरी लगाकर परिवार चलाने वाले छोटे दुकानदारों को हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि सरकार गरीबों के रोजगार पर बुलडोजर चला रही है।
बेतिया राज की भूमि पर वर्षों से बसे लोगों को मालिकाना हक देने और इसके लिए जनवरी 2024 को कट ऑफ डेट घोषित करने की मांग भी प्रमुखता से उठी। किसानों ने रेल, सड़क और अन्य सरकारी परियोजनाओं के नाम पर कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण का विरोध करते हुए कहा कि यदि जमीन ली जाती है तो किसानों को बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए।

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शिक्षा और रेल सुविधा को लेकर भी प्रदर्शन में जोरदार आवाज उठी। प्रदर्शनकारियों ने सभी प्रखंड मुख्यालयों में डिग्री कॉलेज खोलने तथा नरकटियागंज से पाटलिपुत्र तक दो जोड़ी नई ट्रेन चलाने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बढ़ते अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।

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सभा को संबोधित करते हुए जिला किसान सभा के सचिव राधामोहन यादव, अध्यक्ष अशोक मिश्र, खेत मजदूर यूनियन के नेता सुबोध मुखिया, राजेन्द्र साह, वीरन यादव, अच्छे लाल सहनी, नौजवान संघ के नेता तारिक अनवर, इदू अंसारी, ओम प्रकाश, मनोज साह, एटक प्रभारी ओम प्रकाश क्रांति, किसान नेता तारकेश्वर सहनी और मोहन यादव समेत कई नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि देश और प्रदेश में नफरत की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि किसानों, मजदूरों और युवाओं के असली मुद्दों को दबाया जा रहा है। नेताओं ने बुलडोजर राज खत्म करने और जनहित की नीतियां लागू करने का आह्वान किया। बेतिया में हुए इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दिया कि किसानों, मजदूरों और युवाओं के बीच सरकार के खिलाफ असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। बड़ी संख्या में जुटी भीड़ और बुलंद नारों ने प्रशासन और सरकार दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

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