सरकारी डिग्री कॉलेज का उदघाटन विवादों में

मंच पर गुटबाजी और ‘विवादित चेहरे’ की मौजूदगी से मचा बवाल

BIHAR SWATANTRA PRABHAT Picture
Published On

स्वतंत्र प्रभात | पटना 

बिहार से सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल के लिए वेसे तो शनिवार का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा था। वर्षों के इंतजार के बाद सरकारी डिग्री कॉलेज का उद्घाटन हुआ, उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव  ने फीता काटकर कॉलेज का शुभारंभ किया, मंच से शिक्षा, विकास और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य ,ज्ञान विज्ञान की बड़ी-बड़ी बातें हुईं। लेकिन समारोह खत्म होते-होते पूरा कार्यक्रम शिक्षा से ज्यादा विवाद, गुटबाजी और मंच पर विवादित चेहरों की मौजूदगी को लेकर चर्चा में आ गया।मंच पर गुटबाजी और ‘विवादित चेहरे’ की मौजूदगी से मचा बवाल

उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव  ने अपने संबोधन में कहा कि यह सिर्फ त्रिवेणीगंज ही नहीं बल्कि पूरे इलाके के लिए गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि अब इस क्षेत्र के छात्र-छात्राओं, खासकर गरीब  बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। बीएनएमयू के कुलपति डॉ  ने इसे विश्वविद्यालय के अंतर्गत पहला सरकारी डिग्री कॉलेज बताते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की बात कही।  सांसद दिलेश्वर कामत  औरविधायक सोनम रानी व एनडीए नेताओं ने भी इसे क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताया। लेकिन मंच से दिए जा रहे आदर्शवादी भाषणों के समानांतर कार्यक्रम स्थल पर जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने पूरे आयोजन की गरिमा और सुचिता  परगहरे सवाल  खड़े जरूर कर दिए हैं ।मंच पर गुटबाजी और ‘विवादित चेहरे’ की मौजूदगी से मचा बवाल

मंच पर जगह नहीं, पूर्व विधायक लौट गईं

बीजीआर माइनिंग एवं इंफ्रा तथा शार प्रोजेक्ट्स के कर्मचारियों ने मनाया मदर्स डे Read More बीजीआर माइनिंग एवं इंफ्रा तथा शार प्रोजेक्ट्स के कर्मचारियों ने मनाया मदर्स डे

समारोह के दौरान जदयू की अंदरूनी गुटबाजी व बर्चस्व  खुलकर सामने आ गई। क्षेत्र की पूर्व विधायक बीना भारती  को मंच पर जगह तक नहीं मिली। बताया जाता है कि काफी देर तक इंतजार करने के बाद वे नाराज होकर चुपचाप कार्यक्रम स्थल से लौट गईं। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस पार्टी के नेता वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय रहे, उन्हें मंच पर सम्मान नहीं मिला, जबकि दूसरे चेहरे पूरे कार्यक्रम में प्रभावशाली भूमिका में दिखे।

90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत हजारीबाग में लगे शिविर Read More 90 दिवसीय विधिक जागरूकता अभियान के तहत हजारीबाग में लगे शिविर

सेक्स रैकेट आरोपी की मौजूदगी बनी सबसे बड़ा सवाल

एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार की जा रही है निगरानी Read More एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार की जा रही है निगरानी

पूरे समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा उस विवादित व्यक्ति की मौजूदगी को लेकर रही, जो अवैध सेक्स रैकेट मामले में जेल जा चुका है। जानकारी के अनुसार 18 जून 2024 को पुलिस छापेमारी में उक्त व्यक्ति को 12 बालिग व नावालिग लड़कियों के साथ  गिरफ्तार किया गया था ,और मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया था,और लंबे समय तक जेल में रहने के बाद हाल ही में बाहर आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह कार्यक्रम में आयोजकों की तरह न सिर्फ सक्रिय दिख रहा था,बल्कि उनकी सक्रियता उन्हें मुख्य आयोजक प्रदर्शित कर रही थी। मंच पर उसकी मौजूदगी, नेताओं और अधिकारियों के बीच उसकी आवाजाही ने लोगों को हैरान कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट, मीम्स और कटाक्षों की बाढ़ आ गई।

लोग तंज कसते दिखे —
“शिक्षा के मंदिर के उद्घाटन में आखिर विवादित चेहरों को इतना महत्व क्यों?”
“क्या अब सरकारी कार्यक्रमों में पहुंच और रसूख ही नई योग्यता बन चुकी है?”
कुलपति और आयोजकों पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में अब बीएनएमयू प्रशासन और आयोजन समिति भी सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े सरकारी और शैक्षणिक कार्यक्रम में कौन मंच के आसपास रहेगा और किसे अहमियत मिलेगी, इसकी जिम्मेदारी आयोजकों और विश्वविद्यालय प्रशासन की भी बनती है।
कुलपति डॉ विमलेन्दु शेखर झा  से जब विवादित व्यक्ति की मौजूदगी को लेकर पत्रकारों ने  सवाल पूछा  तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय मंच से नैतिकता और शिक्षा की बातें करता रहा, जबकि उसी कार्यक्रम में विवादित चेहरों की सक्रियता सबके सामने दिखती रही।आखिर वह व्यक्ति किस हैसियत से मंच पर मौजूद रहे ।

उद्घाटन से ज्यादा विवाद की चर्चा

जिस कॉलेज उद्घाटन को इलाके के भविष्य और शिक्षा की नई शुरुआत माना जा रहा था, वह अब राजनीतिक फजीहत, गुटबाजी और विवादित मौजूदगी की वजह से चर्चा का विषय बन गया है। क्षेत्र में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सरकारी आयोजनों में अब मर्यादा और छवि से ज्यादा राजनीतिक समीकरण और रसूख मायने रखने लगे हैं? त्रिवेणीगंज को भले पहला सरकारी डिग्री कॉलेज मिल गया हो, लेकिन उद्घाटन समारोह ने शिक्षा से ज्यादा विवादों की ऐसी इबारत लिख दी, जिसकी चर्चा अब गांव से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह हो रही है।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें