शांति समिति की बैठक में पसरा सन्नाटा

खाली कुर्सियों ने खोली प्रशासनिक तैयारी की पोल

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त्रिवेणीगंज, ।संवाददाता स्वतंत्त्र प्रभात 

बकरीद जैसे संवेदनशील पर्व को लेकर सोमवार को अनुमंडल सभागार में आयोजित अनुमंडलीय शांति समिति की बैठक खुद “अशांति” का संकेत देती नजर आई। प्रशासन जहां पर्व को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के दावे कर रहा था, वहीं बैठक में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समिति सदस्यों की भारी अनुपस्थिति ने पूरे आयोजन को महज खानापूर्ति बनाकर रख दिया।
बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने की। उद्देश्य था पर्व के दौरान विधि-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और आपसी सौहार्द को लेकर रणनीति तैयार करना। लेकिन सभागार में लगी अधिकांश कुर्सियां खाली रहीं। अनुमंडल स्तरीय इस महत्वपूर्ण बैठक में गिने-चुने लोग ही मौजूद दिखे।
स्थिति ऐसी रही कि खाली कुर्सियां खुद प्रशासनिक उदासीनता की गवाही देती नजर आईं।शांति समिति की बैठक में पसरा सन्नाटा जिन जनप्रतिनिधियों और समिति सदस्यों के सुझावों के आधार पर क्षेत्र की संवेदनशील समस्याओं का समाधान निकलना था, वही बैठक से नदारद रहे। इससे साफ संकेत मिला कि शांति समिति की बैठकों को अब गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।बैठक में मौजूद अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी, पुलिस गश्ती और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की बात दोहराई। लोगों से भाईचारा बनाए रखने की अपील भी की गई। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब बैठक में ही अधिकांश जिम्मेदार लोग शामिल नहीं हुए तो जमीनी स्तर पर समन्वय कितना प्रभावी होगा?शांति समिति की बैठक में पसरा सन्नाटा

स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्व को लेकर आयोजित ऐसी बैठकों में सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी होती है। मगर इस बार की तस्वीर ने साबित कर दिया कि प्रशासनिक बैठकें अब सिर्फ फाइलों और फोटो तक सीमित होकर रह गई हैं। बैठक में एसडीओ विभाष कुमार, डीसीएलआर संस्कार रंजन, स्वास्थ्य प्रबंधक एस अदीब अहमद, सज्जन कुमार संत, भूमनेश्वरी साह, श्याम यादव, बोधि यादव, जगदेव राम, डीके यादव, प्रदीप कुमार सिंह मुन्ना, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।

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