लालगंज तहसील में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अधिवक्ताओं का चक्रव्यूह धरना प्रदर्शन

प्रवीण तिवारी Picture
Published On

मीरजापुर।

मीरजापुर। तहसील लालगंज में राजस्व न्यायालयों की कथित मनमानी, मुकदमों के निस्तारण में देरी, पत्रावलियों को लंबित रखने और न्यायिक प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा। शुक्रवार को उपरौध अधिवक्ता समिति के बैनर तले अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में चक्रव्यूह धरना-प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की और प्रशासन के सामने विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

IMG_20261009_153011

अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी लालगंज अजीत कुमार तथा तहसीलदार लालगंज की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए जिलाधिकारी मिर्जापुर को संबोधित ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि तहसील में न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब ग्रामीणों और वादकारियों को यदि समय पर राहत नहीं मिलेगी, तो न्याय व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।

सड़क पर उतरे सपा कार्यकर्ता Read More सड़क पर उतरे सपा कार्यकर्ता

लालगंज तहसील में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अधिवक्ताओं का चक्रव्यूह धरना प्रदर्शन

दिल्ली में प्रदर्शन की आहट से रेलवे अलर्ट, कानपुर सेंट्रल पर DRM का औचक निरीक्षण; शताब्दी-श्रमशक्ति समेत 10 ट्रेनें प्रभावित! Read More दिल्ली में प्रदर्शन की आहट से रेलवे अलर्ट, कानपुर सेंट्रल पर DRM का औचक निरीक्षण; शताब्दी-श्रमशक्ति समेत 10 ट्रेनें प्रभावित!

अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी लालगंज के न्यायालय में धारा 76 से संबंधित पत्रावलियों को दर्ज करने में कथित तौर पर मनमानी की जा रही है। आरोप है कि कुछ पत्रावलियों को दर्ज कर सुनवाई और आदेश की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जाती है, जबकि अन्य मामलों की फाइलें लंबे समय तक लंबित रखी जाती हैं। इसी तरह धारा 80 से संबंधित मामलों में भी बिना समुचित सुनवाई व आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए वाद खारिज किए जाने तथा कोर्ट फीस जमा कराने में कथित अनियमितताओं की शिकायत उठाई गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि न्यायालयों में मुकदमों की सुनवाई और निस्तारण निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं होगा, तो इसका सीधा नुकसान उन ग्रामीणों को उठाना पड़ेगा, जो अपनी जमीन और राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए महीनों तक तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं।

विपक्ष के प्रदर्शन से पहले रेलवे का फैसला, 9 और 10 अक्टूबर को 61 ट्रेनें रद्द Read More विपक्ष के प्रदर्शन से पहले रेलवे का फैसला, 9 और 10 अक्टूबर को 61 ट्रेनें रद्द

लालगंज तहसील में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अधिवक्ताओं का चक्रव्यूह धरना प्रदर्शन

धरना-प्रदर्शन के दौरान धारा 32/38 से संबंधित मामलों की पत्रावलियों को लेकर भी अधिवक्ताओं ने गंभीर आपत्तियां जताईं। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में फाइलें समय से दर्ज नहीं की जातीं, अनावश्यक रूप से तारीखें दी जाती हैं और सुनवाई के दौरान वादकारियों को अनुपस्थित दर्शाकर पत्रावलियां खारिज किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। अधिवक्ताओं ने कहा कि न्यायालयीन कार्यवाही में पारदर्शिता और समानता का पालन होना चाहिए, ताकि किसी भी

 

वादकारी को पक्षपात या मनमानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में आदेश महीनों तक लंबित रहने से मुकदमों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। समिति ने संबंधित अभिलेखों और पत्रावलियों की जांच कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की कि आखिर किन परिस्थितियों में मामलों को लंबित रखा जा रहा है और न्यायालयीन कार्यवाही में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

 

अधिवक्ताओं ने तहसीलदार लालगंज की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कुछ मामलों में आदेश पारित करने की प्रक्रिया तथा आदेशों में कथित बदलाव और अपील से संबंधित कार्यवाही को लेकर वादकारियों में असंतोष है। समिति ने संबंधित पत्रावलियों, आदेशों और अभिलेखों का परीक्षण कराकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना है कि राजस्व न्यायालयों में प्रत्येक आदेश साक्ष्यों, अभिलेखों और विधिक प्रावधानों के आधार पर पारित होना चाहिए। किसी भी वादकारी को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसके मामले में निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने प्रशासन से न्यायालयीन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित करने की मांग की।

 

तहसील परिसर की बुनियादी समस्याओं को लेकर भी अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि परिसर में जलजमाव, गंदगी और जलनिकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। बारिश के दौरान अधिवक्ताओं के चैंबर के आसपास पानी भरने से आवागमन प्रभावित होता है और वादकारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अधिवक्ताओं ने कहा कि तहसील परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और वादकारी अपने मुकदमों के सिलसिले में पहुंचते हैं, लेकिन साफ-सफाई और जलनिकासी जैसी आवश्यक सुविधाओं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने प्रशासन से परिसर की साफ-सफाई, जलनिकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त कराने की मांग की, ताकि न्यायालय आने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।

 

आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण पर भी उठाए सवाल

अधिवक्ता समिति ने आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। अधिवक्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में शिकायतों का वास्तविक समाधान किए बिना केवल औपचारिकता पूरी कर निस्तारण दर्शा दिया जाता है, जबकि शिकायतकर्ता की समस्या जस की तस बनी रहती है। उनका कहना है कि शासन की जनसुनवाई व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का वास्तविक समाधान करना है, न कि केवल कागजों पर शिकायतों का निस्तारण दिखाना। समिति ने मांग की कि शिकायतों की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए और संबंधित शिकायतकर्ता की समस्या का समाधान सुनिश्चित करने के बाद ही निस्तारण की प्रक्रिया पूरी मानी जाए।

 

अधिवक्ताओं ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में मुकदमों की सुनवाई में देरी, पत्रावलियों का लंबित रहना और शिकायतों के समाधान में कथित लापरवाही जैसी समस्याओं का सबसे अधिक असर गरीब और सामान्य वर्ग के लोगों पर पड़ता है। जमीन से जुड़े विवादों में न्याय पाने के लिए ग्रामीणों को बार-बार तहसील आना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। यदि उन्हें समय पर न्याय नहीं मिलता, तो उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

 

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

 

उपरौध अधिवक्ता समिति ने जिलाधिकारी मिर्जापुर से मांग की है कि तहसील लालगंज में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा संबंधित पत्रावलियों, आदेशों और अभिलेखों का विधिक आधार पर परीक्षण कराया जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से अनियमितता, लापरवाही अथवा नियमों के विरुद्ध कार्य किए जाने की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही राजस्व न्यायालयों में मामलों की समयबद्ध सुनवाई, पत्रावलियों का पारदर्शी रखरखाव, आईजीआरएस शिकायतों का वास्तविक निस्तारण और तहसील परिसर की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की गई।

 

प्रदर्शन के दौरान तहसील लालगंज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मौर्य सहित तुलसीदास प्रजापति, नीरज कुमार, अरुण कुमार त्रिपाठी एडवोकेट, स्वयं प्रकाश त्रिपाठी एडवोकेट, शिवम पांडेय एडवोकेट, उमाशंकर पटेल, शरद मौर्य एडवोकेट, कुंवर मौर्य एडवोकेट, संजय मौर्य, धर्मराज, निहाल खान, गप्पू, गोविंद यादव, मनीष कुमार, उमेश त्रिवेदी, सुरेंद्र तिवारी,

 

जयप्रकाश दुबे, दिनेश मौर्य, अजीत कुमार, राजेश मौर्य और आशीष मौर्य समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को उठाया और तहसील की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि अधिवक्ताओं की ओर से उठाए गए सवालों की जांच कराकर वादकारियों को राहत देने और राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें

नवीनतम समाचार