प्रयागराज में पूर्व सीएमएस से 1.78 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, एक आरोपी गिरफ़्तार
बेली अस्पताल के पूर्व सीएमएस को डिजिटल अरेस्ट कर 1.78 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले इंटरस्टेट साइबर गैंग का पुलिस ने खुलासा किया है।
स्वतंत्र प्रभात
ब्यूरो प्रयागराज।
बेली अस्पताल के पूर्व सीएमएस को डिजिटल अरेस्ट कर 1.78 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले इंटरस्टेट साइबर गैंग का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में लखीमपुर खीरी निवासी आयुष अवस्थी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उसके दो साथी निशांत त्रिवेदी निवासी सिकंदराबाद और राजन शुक्ला निवासी पीलीभीत की तलाश जारी है।
डीसीपी साइबर क्राइम सोनम कुमार और एडीसीपी गंगानगर पुष्कर वर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गैंग के सदस्य डिजिटल अरेस्ट और साइबर स्कैम के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में डायवर्ट कराते थे। जांच में करीब 23.80 करोड़ रुपये की रकम अलग-अलग खातों में लेयरिंग के लिए डायवर्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है।
10 प्रतिशत कमीशन के लालच में बना ठगी का हिस्सा।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आयुष अवस्थी Skillora Workforce Solutions Private Limited नाम की मैनपावर सप्लाई फर्म से जुड़ा था। फर्म के नाम से HDFC बैंक में करंट अकाउंट संचालित था। जांच में सामने आया कि इसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने में किया गया।
पूछताछ में आयुष ने बताया कि नवंबर 2025 में निशांत त्रिवेदी के जरिए उसकी मुलाकात पीलीभीत निवासी राजन शुक्ला से हुई थी। राजन ने साइबर फ्रॉड की रकम खाते में डायवर्ट कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया। इसके बाद आयुष उनके साथ मुंबई गया।
मुंबई जाकर ठगी की रकम कराई ट्रांसफर
पुलिस के अनुसार 6 सितंबर को आयुष, निशांत और राजन फ्लाइट से मुंबई पहुंचे। वहां अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर 7 और 8 सितंबर को एसआरएन के पूर्व सीएमएस के खाते से ठगी गई रकम में से 48.50 लाख रुपये आयुष से जुड़े खाते में ट्रांसफर कराए गए। अलग-अलग तारीखों में कुल 1.78 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है।
बैंक स्टेटमेंट की जांच में इस खाते से जुड़े अन्य लेन-देन भी मिले। जांच में यह भी सामने आया कि उत्तराखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लोगों को साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाकर रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई।
23.80 करोड़ रुपये के फंड फ्लो की जांच
पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों की KYC, फंड फ्लो और आरोपियों के मोबाइल नंबरों की CDR व CAF का विश्लेषण किया। जांच में करीब 23 करोड़ 80 लाख रुपये की रकम अन्य बैंक खातों में लेयरिंग के लिए डायवर्ट किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस अब इस रकम के पूरे फंड फ्लो और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
64.61 लाख रुपये फ्रीज।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने साइबर फ्रॉड से संबंधित 64 लाख 61 हजार 990 रुपये की रकम फ्रीज/बरामद कराई है। इसमें बैंक लियन अमाउंट और करंट अकाउंट में मिली रकम शामिल है। इसके अलावा आरोपी से 40 लाख रुपये की दो इंश्योरेंस पॉलिसियां, दो मोबाइल फोन और एक चेकबुक भी बरामद की गई है।
दो अन्य आरोपियों की तलाश, तीन टीमें गठित।
पुलिस ने निशांत त्रिवेदी, निवासी सिकंदराबाद, लखीमपुर खीरी तथा राजन शुक्ला, निवासी दुग्धिया खुर्द बजरिया, पूरनपुर, पीलीभीत को वांछित किया है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए तीन पुलिस टीमें गठित की गई हैं। NCRP और SAMANVAYA पोर्टल के माध्यम से दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी आयुष अवस्थी के खिलाफ लखीमपुर खीरी के गोला थाने में वर्ष 2019 में दहेज हत्या और वर्ष 2020 में आर्म्स एक्ट का मुकदमा भी दर्ज है। अब प्रयागराज साइबर क्राइम थाने में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का मुकदमा दर्ज किया गया
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