संतान की दीर्घायु को माताओं ने रखा जितिया व्रत

जीवित्पुत्रिका व्रत मां के निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और संतान के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है-आचार्य प्रमोद चौबे

राजेश तिवारी Picture
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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता

ओबरा /सोनभद्र-

ॐ श्री सदाशिव महादेव मंदिर में जीवित्पुत्रिका व्रती माताओं ने विधि-विधान से भगवान जीमूतवाहन का पूजन-अर्चन कर संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पुरोहित आचार्य प्रमोद चौबे ने जीवित्पुत्रिका व्रत की भावपूर्ण कथा सुनाई।

उन्होंने बताया कि जीमूतवाहन दया, त्याग और परोपकार के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने एक नागवंशी युवक को गरुड़ के संकट से बचाने के लिए स्वयं को उसके स्थान पर प्रस्तुत कर दिया। उनके इस अद्भुत त्याग से प्रसन्न होकर देवताओं ने जीवन की रक्षा का आशीर्वाद दिया।

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आचार्य ने कहा कि जीवित्पुत्रिका व्रत मां के निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और संतान के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। माताएं निर्जला व्रत रखकर संतान के मंगल की प्रार्थना करती हैं। पूजन की व्यवस्था में रवींद्र श्रीवास्तव, विवेक कुमार मालवीय और मनोज सिंह का सहयोग रहा।

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