श्रीभूमि जिला के पाथारकांदी ब्लॉक क्षेत्र में भव्य समारोह में अंजन दत्त एवं गौरांग देवनाथ का विदाई अभिनंदन

पूर्व छात्रों, अभिभावकों एवं क्षेत्रवासियों की भावपूर्ण उपस्थिति; शिक्षकों के योगदान को किया गया याद

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 श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :
 
श्रीभूमि जिले के पाथारकांदी ब्लॉक क्षेत्र में 1181 नंबर जंगलरटुक एल.पी. स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक अंजन दत्त एवं गौरांग देवनाथ के दीर्घ शिक्षक जीवन के समापन के अवसर पर गत 30 सितंबर बुधवार को विद्यालय परिसर में भव्य एवं भावपूर्ण विदाई अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं की पहल पर आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में पूर्व विद्यार्थी, अभिभावक, स्थानीय नागरिक एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
 
लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे दोनों शिक्षकों ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की शिक्षा देने के साथ-साथ अनुशासन, नैतिकता, संस्कार एवं जीवन-मूल्यों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 
उनके मार्गदर्शन से लाभान्वित हुए कई पूर्व विद्यार्थियों ने समारोह के दौरान छात्र जीवन की पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए दोनों शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।
 
अंजन दत्त विद्यार्थियों के बीच अनुशासनप्रिय एवं मार्गदर्शक शिक्षक के रूप में विशेष रूप से सम्मानित रहे। वहीं गौरांग देवनाथ अपने सरल व्यवहार, विद्यार्थियों के प्रति आत्मीयता और शिक्षण के प्रति समर्पण के लिए लंबे समय से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच सम्मानित रहे हैं।
 
समारोह में क्षेत्र के मुरब्बी एवं वरिष्ठ नागरिकों, अभिभावकों और बड़ी संख्या में महिलाओं के अलावा सीआरसीसी मैना, सीआरसीसी असिमगंज, पाथारकांदी ब्लॉक क्षेत्रीय शिक्षक सम्मेलन के अध्यक्ष एवं सचिव तथा विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षक अब्दुल जलील ने की, जबकि संचालन विद्यालय के पूर्व छात्र फरिद उद्दीन ने किया।
 
पूर्व छात्र-छात्राओं की ओर से दोनों शिक्षकों को स्मृति-चिह्न एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसी शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि केवल उनकी सेवा अवधि से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन पर उनके पड़ने वाले प्रभाव से तय होती है।
 
अंजन दत्त एवं गौरांग देवनाथ ने अपने लंबे शिक्षक जीवन के दौरान जिस समर्पण के साथ विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया, उसकी छाप आज भी उनके पूर्व छात्रों के जीवन में दिखाई देती है। इस अवसर पर कई पूर्व विद्यार्थी अपने शिक्षकों के साथ बिताए पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक हो उठे।
 
विद्यालय जीवन की शरारतें, शिक्षकों की डांट, अनुशासन और स्नेह से जुड़ी यादों ने समारोह के माहौल को भावनात्मक और स्मृतिमय बना दिया।
 
समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने दोनों शिक्षकों के स्वस्थ, सुखी एवं शांतिपूर्ण सेवानिवृत्त जीवन की कामना की। एक शिक्षक विद्यालय से सेवानिवृत्त हो सकता है, लेकिन उसके द्वारा दिए गए संस्कार, शिक्षा और जीवन की सीख कभी सेवानिवृत्त नहीं होती। अंजन दत्त एवं गौरांग देवनाथ का यह विदाई समारोह सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता की इसी भावना का यादगार उदाहरण बनकर सामने आया।
 
 

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