तीन साल तक फाइलों में दबा रहा विद्यालय निर्माण का सपना
मीरजापुर।
मीरजापुर। जिले के लहुरियादह गांव में बच्चों की पढ़ाई के लिए स्वीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण लंबे समय तक अधर में रहने का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने हालिया वीडियो संदेश में लहुरियादह का जिक्र करते हुए बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान ग्रामीणों की मांग पर विद्यालय स्वीकृत किया गया था, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद करीब तीन वर्ष तक विद्यालय निर्माण की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई।

वीडियो में दिव्या मित्तल ने उठाया सवाल
पूर्व डीएम के अनुसार, गांव में पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। ग्रामीणों की इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने नियमों की जानकारी लेकर विद्यालय स्वीकृत कराया था। अपने वीडियो में उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब विद्यालय के लिए व्यवस्था और स्वीकृति मौजूद थी तो तीन वर्ष तक निर्माण क्यों नहीं शुरू हो सका। उनके इस बयान के बाद लहुरियादह का विद्यालय एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा का विषय बन गया।
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मुद्दा सामने आते ही शुरू हुआ निर्माण कार्य
सबसे खास बात यह रही कि पूर्व डीएम के वीडियो में मामला उठने के बाद विद्यालय निर्माण कार्य शुरू होने की जानकारी सामने आई। इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब बच्चों को गांव में ही उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा मिल सकेगी। हालांकि, विद्यालय निर्माण में हुई देरी के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना अभी बाकी है। यह प्रकरण स्वीकृत विकास कार्यों की निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन की जरूरत को भी रेखांकित करता है।


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