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जिस जन्म प्रमाण पत्र को जांच के बाद सचिव ने बताया असंभव, वही प्रमाण पत्र दोबारा कैसे हुआ जारी? किसके आदेश पर चला पूरा खेल, ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
मीरजापुर।
मीरजापुर। विकास खण्ड हलिया क्षेत्र के ग्राम महुगढ़ी निवासी जय कुमार पुत्र तौलन द्वारा अपनी पुत्री जानवी शर्मा के जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध पत्र के अनुसार बच्ची का जन्म 9 मार्च 2021 को घर पर होना बताया गया था

जिसके आधार पर जन्म प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए आवेदन किया गया था। मामले की जांच के बाद संबंधित सचिव द्वारा स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया गया कि आशा एवं आंगनबाड़ी द्वारा ऐसा कोई प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि बच्ची का जन्म वास्तव में ग्राम पंचायत क्षेत्र में घर पर हुआ था। ऐसे में उक्त प्रार्थना पत्र के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किया जाना संभव नहीं बताया गया था
लेकिन अब ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जांच के बाद संबंधित सचिव ने स्वयं प्रमाण पत्र जारी करना संभव नहीं बताया और आवश्यक प्रमाणों के अभाव में आवेदन को निरस्त कर दिया गया, तो आखिर उसी मामले में जन्म प्रमाण पत्र दोबारा कैसे जारी हो गया? आखिर किस अधिकारी के आदेश पर यह प्रमाण पत्र जारी किया गया और किस स्तर पर पहले की जांच रिपोर्ट को दरकिनार किया गया? क्या जांच रिपोर्ट गलत थी या फिर बाद में बिना पर्याप्त आधार के प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया? यह पूरा मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ही मामले में पहले प्रमाणों के अभाव का हवाला देकर प्रमाण पत्र जारी करने से इनकार करना और फिर उसी प्रमाण पत्र का दोबारा जारी हो जाना सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि जांच का विषय है। यदि पहले की जांच सही थी तो प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी हुआ, और यदि बाद में प्रमाण पत्र जारी करना सही था तो पहले आवेदन को निरस्त करने वाले जिम्मेदार लोगों की जांच पर सवाल क्यों न उठे?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि प्रमाण पत्र जारी करने से लेकर उसे पहले निरस्त करने और फिर दोबारा जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि आखिर किसके आदेश पर और किस अधिकारी अथवा कर्मचारी द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि मामले में जिम्मेदारी तय किए बिना केवल कागजी कार्रवाई से सवाल खत्म नहीं होंगे। अब प्रशासन को इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट जवाब देना होगा, वरना विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठ रहे सवाल और भी गंभीर होते जाएंगे।


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