भजन प्रवाह और कथक नृत्य ने बांधा समां, 22 गुरुजनों का हुआ सम्मान

सुमधुर गायकी से प्रभावित श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ में कलामंडपम् प्रेक्षागृह, कैसरबाग में भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन एवं भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “पद्म भूषण डॉ0 एस0एन0 रतनजंकर स्मृति गुरु सम्मान समारोह–2026” का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में संगीत, नृत्य और गुरु-शिष्य परंपरा की समृद्ध विरासत का सुंदर संगम देखने को मिला। समारोह का मुख्य आकर्षण सुप्रसिद्ध सुरसाधक किशोर चतुर्वेदी की भावपूर्ण भजन प्रस्तुति “भजन प्रवाह” रही। उन्होंने “हे री सखी मंगल गौरी”, “राम नाम सुखदाई”, “अच्युतम् केशवम् कृष्ण दामोदरम्” तथा सावन पर आधारित मेघ मल्हार गीत प्रस्तुत कर पूरे सभागार को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
 
उनकी सुमधुर गायकी से प्रभावित श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। इसके पश्चात विदुषी रेनु शर्मा के निर्देशन में “पुष्प वाटिका प्रसंग” पर आधारित समूह कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी गई। कलाकारों की उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति, लयबद्धता और आकर्षक मंच-सज्जा ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह के दौरान संगीत एवं कला जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 22 गुरुजनों को भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके योगदान को नमन करते हुए सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की गई।
 
कार्यक्रम की अध्यक्षता भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 मांडवी सिंह ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संगीत, नृत्य और गुरु-शिष्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समारोह में मुख्य अतिथि डॉ0 राजेश सिंह, प्रमुख सचिव, विधान परिषद उत्तर प्रदेश तथा विशिष्ट अतिथि  राजेश जायसवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि, कलाकार, संगीत प्रेमी और श्रोतागण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन पूनम श्रीवास्तव ने किया। अंत में भातखण्डे एलुमनी एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा भारद्वाज एवं सचिव गिरीश चन्द्र बहुगुणा ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। गरिमामय वातावरण में संपन्न यह समारोह संगीत और संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।

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