नैनो उर्वरकों  का प्रयोग , पर्यावरण एवं भारतीय कृषि के लिए लाभदायक : डॉ. विवेक दीक्षित।

इफको के नैनो उर्वरक वर्तमान कृषि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही यह पर्यावरण के भी अनुकूल है।

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।
 
इफको के नैनो उर्वरक वर्तमान कृषि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इनके प्रयोग से सस्ती एवं टिकाऊ खेती करने में सफलता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही यह पर्यावरण के भी अनुकूल है।
 
 उक्त बातें , डॉ.विवेक दीक्षित, प्रधानाचार्य, मोतीलाल नेहरू फार्मरस ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट कॉर्डेट इफको फूलपुर ने  मुख्य अतिथि  ग्राम  गधिना (लोहार का पूरा )वि.खं. मऊआयमा  प्रयागराज के कृषकों  के बीच
आयोजित  एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं ।
 
 उन्होंने उपस्थित  कृषक प्रतिभागियों को कार्डेट एवं इफको के क्रियाकलाप से परिचित कराया तथा धान की फसल में नैनो यूरिया प्लस, नैनो कॉपर, नैनो जिंक, एवं नैनो डीएपी के प्रयोग की विस्तार से जानकारी दी।   
 
नैनो डीएपी से बीज/जड़/कंद/सेट शोधित कर बुवाई/रोपाई करने की सलाह दी। दानेदार डीएपी की मात्रा आधी प्रयोग करें नैनो डीएपी 500 मिलीलीटर की बोतल मात्र ₹600 की है जो कि दानेदार डीएपी से काफी सस्ता है।  नैनो यूरिया फसल की पत्तियों पर @4 ml प्रति लीटर पानी से घोल बनाकर स्प्रे करें। 
 
इसी क्रम में संस्थान की वरिष्ठ अधिकारी  सविता शुक्ला ने फल संरक्षण एवं खाद्य प्रसंस्करण एवं स्वयं सहायता समूह से संबंधित जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि विभिन्न प्रकार के अचार मुरब्बा और जूस बनाकर के हम  अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं । 
समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने खेती में जैव उर्वरकों एवं जैव अप घटकों के प्रयोग की जानकारी दी।  प्रभारी प्रशिक्षण मुकेश तिवारी ने कार्यक्रम का संचालन किया एवं स्वस्थ व टिकाऊ खेती के लिए मृदा परीक्षण के महत्व को  बताया।
 
  कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों  को कारडेट की विभिन्न इकाइयों का भ्रमण भी कराया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण हेतु बेल की पौध का निःशुल्क वितरण किया गया।
 
 
 

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