सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में दीक्षांत उत्सव के उपलक्ष्य में प्रभात फेरी एवं योगाभ्यास का आयोजन

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में आगामी 29 जून  को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह के क्रम में राजभवन से प्राप्त मार्गदर्शन के आधार पर

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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता 
 
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर में आगामी 29 जून  को आयोजित होने वाले दशम दीक्षांत समारोह के क्रम में राजभवन से प्राप्त मार्गदर्शन के आधार पर कुलपति प्रोफेसर कविता शाह के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिदिन प्रातःकाल प्रभात फेरी एवं योगाभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं।
 
प्रातःकाल परिसर स्थित दीक्षांत मंच पर योगाभ्यास के उपरांत प्रभात फेरी निकाली जा रही है। प्रभात फेरी के दौरान भारतीय परंपरा के मंगल गीतों का गायन एवं आध्यात्मिक वातावरण के सृजन का प्रयास किया जा रहा है, जिससे विश्वविद्यालय परिसर में सकारात्मक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक वातावरण का संचार हो रहा है।
 
इस कार्यक्रम के संबंध में कुलपति प्रोफेसर कविता शाह ने कहा कि प्रातःकाल विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सहभागिता से इस प्रकार का सकारात्मक वातावरण निर्मित होने से पूरे विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक चेतना का संचार होगा। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के समग्र विकास, सांस्कृतिक चेतना एवं आध्यात्मिक उन्नयन का भी आधार है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए उत्सव का अवसर होता है और ऐसे अवसरों पर इस प्रकार के मूल्यपरक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं।
 
कार्यक्रम संयोजक एवं हिंदी विभाग के आचार्य प्रोफेसर सत्येन्द्र दुबे ने बताया कि दीक्षांत समारोह तक प्रतिदिन प्रातःकाल परिसर में प्रभात फेरी, योगाभ्यास एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताते हुए विश्वविद्यालय परिसर में निवासरत सभी शिक्षक परिवारों से भी प्रभात फेरी में सम्मिलित होने का आग्रह किया, जिससे परिसर का सकारात्मक, ऊर्जावान एवं रचनात्मक वातावरण और अधिक सुदृढ़ हो सके।
 
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह की गरिमा एवं उपादेयता की दृष्टि से शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण अत्यंत मूल्यवान सिद्ध होता है।
यह जानकारी विश्वविद्यालय के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने दी है।
 

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