क्रूड के दाम गिरने पर भी सस्ता क्यों नहीं हो रहा तेल?
दुनिया में ब्रेंट क्रूड 70-75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। मार्च 2026 में होर्मुज बंद होने के बाद ये 115 डॉलर तक पहुंचा था। लेकिन दिल्ली, मुंबई, कानपुर के पेट्रोल पंप पर कीमत वही खड़ी है।
दुनिया में ब्रेंट क्रूड 70-75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। मार्च 2026 में होर्मुज बंद होने के बाद ये 115 डॉलर तक पहुंचा था। लेकिन दिल्ली, मुंबई, कानपुर के पेट्रोल पंप पर कीमत वही खड़ी है। तेल अभी भी 105 रुपए लीटर तक मिल रहा है जबकि सरकार 20 फीसदी एथेनॉल की मिलावट भी कर रही है। आम आदमी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब क्रूड के दाम गिर रहे तब तेल सस्ता क्यों नहीं हो रहा है ? जवाब एक लाइन का नहीं है। इसके पीछे 4 कारण हैं। टैक्स ही असली खेलता है- भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत का 50-55% हिस्सा टैक्स होता है।
इसमें केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्य का वैट शामिल है। 2020 में जब कोरोना में क्रूड 20 डॉलर पर गिर गया था, तब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी थी। नतीजा ये हुआ कि क्रूड सस्ता होने का फायदा पंप तक नहीं पहुंचा, और लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। 2026 में भी वही पैटर्न है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सरकार अगर चाहे तो एक्साइज घटाकर तुरंत 5-7 रुपए लीटर राहत दे सकती है। लेकिन सरकार ऐसा नहीं करती क्योंकि तेल से मिलने वाला टैक्स राजकोष की सबसे बड़ी आमदनी है। बजट बैलेंस रखना है तो टैक्स घटाना मुश्किल है। कई बार होता ये है कि क्रूड गिरता है तो सरकार टैक्स बढ़ा देती है। क्रूड बढ़ता है तो कंपनियां कीमत नहीं बढ़ा पातीं। बीच में जनता फंस जाती है। तेल कंपनियों का घाटा और अंडर-रिकवरी- फरवरी 2026 में जब होर्मुज बंद हुआ था, क्रूड 72 डॉलर से बढ़कर 115 डॉलर पर चला गया था।
लेकिन चुनाव और होर्मुज संकट के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने कीमत नहीं बढ़ाई। नतीजा ये हुआ कि कंपनियों को प्रति लीटर 25 रुपए से ज्यादा का नुकसान होने लगा। IMF ने भी कहा था कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर नहीं रखी जा सकतीं। अब जब क्रूड गिरा है, कंपनियां पहले अपने घाटे की भरपाई कर रही हैं। इसलिए क्रूड 70 डॉलर पर आने के बाद भी कंपनियां 2-3 रुपए लीटर की कटौती कर रही हैं, 10-15 रुपए की नहीं। डॉलर-रुपया का खेल- भारत 85% क्रूड आयात करता है। भुगतान डॉलर में होता है। अगर रुपया कमजोर है तो क्रूड भले सस्ता हो, भारत के लिए महंगा पड़ता है। अभी 1 डॉलर 72 रुपए के आसपास है। इसलिए क्रूड में 10% गिरावट का असर सिर्फ 3-4% ही दिखता है। जब रुपया मजबूत होता है और क्रूड गिरता है, तब ही असली राहत मिलती है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर ये दोनों फैक्टर साथ आएं तो पेट्रोल 6-7 रुपए लीटर सस्ता हो सकता है।
टाइम लैग और इन्वेंट्री का गणित- तेल कंपनियां क्रूड 30-45 दिन पहले खरीदती हैं। यानी आज जो क्रूड 70 डॉलर पर मिल रहा है, वो शायद मई के रेट पर खरीदा गया है जब क्रूड 90 डॉलर पर था। दूसरा, कंपनियां फेजवाइज कीमतें बढ़ाती-घटाती हैं। 11 दिन में 4 बार बढ़ोतरी का पैटर्न 2026 में देखा गया। अब गिरावट भी धीरे-धीरे पास ऑन हो रही है। दिल्ली में 9 दिन में पेट्रोल 78 पैसे सस्ता हुआ है। तो कब सस्ता होगा? पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, अगर ब्रेंट क्रूड कई हफ्तों तक 80-85 डॉलर के दायरे में रहा तो पेट्रोल-डीजल 2-5 रुपए लीटर सस्ता हो सकता है। लेकिन शर्त ये है कि सरकार एक्साइज न बढ़ाए, रुपया स्थिर रहे, और होर्मुज जैसे नए संकट न आएं। क्रूड का दाम गिरना जरूरी है,
Read More अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय नवनिर्माण सेना ने किया क्रिकेट प्रतियोगिता का शुभारंभलेकिन काफी नहीं। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत 3 चीजें तय करती हैं: क्रूड का इंटरनेशनल रेट, रुपया-डॉलर का रेट, सरकार का टैक्स, जब तक तीनों साथ में फेवर में नहीं आते, पंप पर बोर्ड वही रहेगा। इसलिए अगली बार जब न्यूज में "क्रूड 10% गिरा" दिखे, तो समझ लेना कि पंप पर असर सिर्फ 1-2 रुपए का आएगा। बाकी 8 रुपए टैक्स और घाटे की भरपाई में चले जाते हैं।


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