टोंस नदी पर बालू माफियाओं का कब्जा! प्रशासन मौन

पिपरहटा घाट पर खुलेआम लूट जारी।

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खीरी, प्रयागराज। यमुनापार क्षेत्र के खीरी थाना अंतर्गत कचरा चौकी के पास स्थित पिपरहटा घाट इन दिनों बालू माफियाओं के कब्जे में है। टोंस नदी से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन नावों के जरिए दिन-रात किया जा रहा है। बावजूद इसके, प्रशासन और पुलिस खामोश हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सुबह से देर रात तक नावें बालू से लदी नदी से बाहर निकलती रहती हैं। घाट पर ट्रैक्टर और ट्रक कतारबद्ध खड़े रहते हैं। बालू माफिया खुलेआम सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही खनन विभाग ने रोक लगाने की कोशिश की।
 
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह कारोबार फल-फूल रहा है। जब खनन अधिकारी वैभव सोनी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने “मीटिंग में व्यस्त” बताकर फोन काट दिया। इस रवैये से ग्रामीणों में और आक्रोश फैल गया। अवैध खनन के कारण टोंस नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है। नदी की गहराई बढ़ने से तटबंध कमजोर पड़ रहे हैं। बरसात में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीण किसानों का कहना है कि खेतों की उपजाऊ मिट्टी बह रही है, जिससे उनकी जमीनें बर्बाद हो रही हैं। क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी और खनन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
 
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है “अगर कुछ दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरा गांव सड़क पर उतरकर विरोध करेगा।” ग्रामीणों ने कहा कि वे टोंस नदी की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे, चाहे धरना देना पड़े या गिरफ्तारी झेलनी पड़े। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में खनन होते हुए भी अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ती? क्या प्रशासनिक तंत्र माफियाओं के दबाव में है? क्या नदी की रेत की लूट में अंदरखाने कोई सांठगांठ है।पिपरहटा घाट पर तत्काल छापेमारी कर अवैध खनन रोका जाए। जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कर कार्रवाई की जाए। घाट पर स्थायी पुलिस चौकी स्थापित की जाए। पर्यावरण को बचाने के लिए नियमित निगरानी टीम गठित की जाए।
 
“नदी हमारी जान है, इसे बर्बाद नहीं होने देंगे” ग्रामीण खीरी और आसपास के गांवों में अब माहौल गर्म है। लोग बालू माफियाओं से नाराज हैं। एक बुजुर्ग किसान ने कहा “नदी हमारी जान है। इसे बचाने के लिए हम आखिरी दम तक लड़ेंगे।” टोंस नदी की रेत लूटने वालों पर शिकंजा कसने की जरूरत है, वरना आने वाले दिनों में यह नदी नहीं, सूखी नाली बनकर रह जाएगी। 

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