10 महीने बाद दो लाख रुपये से नीचे आई चांदी, सोना भी 500 रुपये सस्ता
दिल्ली में चांदी 4,000 रुपये टूटकर 1.98 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंची, डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजार में कमजोरी का असर
नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। मंगलवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 4,000 रुपये घटकर 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। करीब 10 महीने बाद चांदी का भाव दो लाख रुपये के स्तर से नीचे पहुंचा है। वहीं, सोने की कीमत में भी 500 रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। मंगलवार को इसकी कीमत घटकर 1,98,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। इसी तरह, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 500 रुपये टूटकर 1,45,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि सोमवार को यह 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम था। ये कीमतें सभी करों सहित बताई गई हैं।
डॉलर की मजबूती से कीमती धातुओं पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ा है। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च विश्लेषक जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, निकट भविष्य में घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
विदेशी बाजार में भी गिरावट
वैश्विक बाजार में हाजिर सोना गिरकर 4,011.44 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी एक प्रतिशत से अधिक टूटकर 53.41 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, चांदी में सोने के मुकाबले अधिक कमजोरी दिखाई दे रही है। 54 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे कारोबार करने के कारण इस पर बिकवाली का दबाव बढ़ा है। औद्योगिक मांग को लेकर बनी चिंताएं भी चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
फेडरल रिजर्व की बैठक पर निवेशकों की नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। ब्याज दरों पर फैसले और केंद्रीय बैंक की आगे की नीति को लेकर मिलने वाले संकेतों से सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की चाल, वैश्विक मांग और ब्याज दरों से जुड़े संकेत आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करेंगे। हालांकि, कीमतों में आगे गिरावट होगी या तेजी लौटेगी, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।


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