प्रो. कमरुल हक की रहस्यमयी मौत के 28 साल बाद फिर उठी CBI जांच की मांग

परिजनों ने जताई सुनियोजित हत्या की आशंका, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की अपील। 28 साल बाद भी अनसुलझी है प्रो. कमरुल हक की मौत की गुत्थी, निष्पक्ष जांच की मांग बरकरार।

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 श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :  असम बराक घाटी के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं राजनेता तथा पाथारकांदी कॉलेज, बीडीए कॉलेज और कमरुल हक जूनियर कॉलेज सहित कई शिक्षण संस्थानों के संस्थापक स्वर्गीय प्रोफेसर कमरुल हक की रहस्यमयी मौत के 28 वर्ष बाद भी उनके निधन की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
 
उनकी मौत की निष्पक्ष जांच के लिए एक बार फिर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठी है। गत 19 अक्टूबर को प्रो. कमरुल हक की 28वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पाथारकांदी में शोक एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पाथारकांदी कॉलेज और कमरुल हक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं, गैर-शिक्षण कर्मचारियों तथा क्षेत्र के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शोक रैली में हिस्सा लिया।
 
रैली में शामिल लोगों ने काली पट्टी धारण कर दिवंगत शिक्षाविद् को श्रद्धांजलि दी। वाहनों और मोटरसाइकिलों पर काले झंडे लगाकर भी शोक व्यक्त किया गया। जिले के पाथारकांदी से पूर्वगुल की ओर निकली शोक रैली स्वर्गीय प्रो. कमरुल हक की समाधि पर पहुंची। वहां उपस्थित लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। प्रार्थना सभा के बाद आयोजित चर्चा में दिवंगत प्रो. कमरुल हक के छोटे भाई एवं कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मंजुरुल हक ने उनकी मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह घटना महज एक सड़क दुर्घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित हत्या की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
 
28 साल बाद भी अनसुलझी है प्रो. कमरुल हक की मौत की गुत्थी, निष्पक्ष जांच की मांग बरकरार डॉ. मंजुरुल हक के अनुसार, दुर्घटना के दौरान वैन लगभग 200 फुट नीचे लुढ़क गई थी, लेकिन उसमें सवार अन्य लोग सुरक्षित रहे और केवल प्रो. कमरुल हक की मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि उनके शरीर के हाथ-पैर और गर्दन की हड्डियां टूटी हुई थीं तथा सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोट के निशान थे। उन्होंने कहा कि घटना के समय उनके साथ मौजूद कुछ लोग आज भी जीवित हैं और पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए। भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन
 
डॉ. मंजुरुल हक ने बताया कि प्रो. कमरुल हक की मौत का रहस्य उजागर करने तथा CBI जांच की मांग को लेकर प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपे जाते रहे हैं। इसके बावजूद अब तक उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से परिवार के सदस्यों और उनके समर्थकों में निराशा है।
 
1998 में हुई थी रहस्यमयी दुर्घटना.
 
उल्लेखनीय है कि 19 अक्टूबर 1998 को गुवाहाटी से पाथारकांदी लौटते समय काछार जिले के मालिडहर में एक रहस्यमयी वाहन दुर्घटना में प्रो. कमरुल हक की मौत हो गई थी। उनके आकस्मिक निधन से बराक घाटी के शिक्षा एवं राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी। उनके निधन के बाद से ही परिवार के सदस्य और समर्थक घटना की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कारण सामने लाने की मांग करते आ रहे हैं। घटना के 28 वर्ष बीत जाने के बावजूद मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक बार फिर CBI जांच की मांग तेज हो गई है।
 
 
 

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