राज भवन तिलोई में उमड़ा सनातन आस्था का जनसैलाब 

अंतरराष्ट्रीय कथावाचक शांतनु जी महाराज के श्रीमुख से रामकथा श्रवण करने पहुंचे हजारों श्रद्धालु, कई रियासतों के राजपरिवारों सहित सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की रही सहभागिता

हर्षिता यादव  Picture
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तिलोई, अमेठी। धर्म, आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा के अद्भुत संगम के रूप में तिलोई स्थित राज भवन इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री एवं तिलोई रियासत के राजा मयंकेश्वर शरण सिंह के सौजन्य से आयोजित अमृतमयी श्रीराम कथा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। अंतरराष्ट्रीय कथावाचक शांतनु जी महाराज के श्रीमुख से भगवान श्रीराम की महिमा, आदर्शों और जीवन मूल्यों का श्रवण करने के लिए अमेठी सहित आसपास के कई जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
 
कथा स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।इस धार्मिक आयोजन में विभिन्न रियासतों के राजपरिवारों के सदस्यों के साथ सांसदों, विधायकों, मंत्रियों अधिकारियों - कर्मचारियों ‌और अनेक गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता भी आकर्षण का केंद्र बनी रही । श्रीराम कथा के माध्यम से जहां श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और प्रेरणा प्राप्त किए, वहीं आयोजन सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और सामाजिक समरसता के संदेश को भी व्यापक रूप से प्रसारित किया।
 
रामकथा में गूंजा सनातन संस्कृति और भारतीय अस्मिता का संदेश राज भवन तिलोई में आयोजित श्रीराम कथा प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही । कथा व्यास शांतनु जी महाराज भगवान श्रीराम के चरित्र, मर्यादा, त्याग, करुणा, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श जीवन के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भक्तों को धर्म एवं सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।कथा के दौरान राजा मयंकेश्वर शरण सिंह का श्रद्धालुओं के बीच पहुंचकर उनसे संवाद करना और अपने विचार व्यक्त करना भी चर्चा का विषय बना रहा।
 
उनके संबोधन में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान का संदेश प्रमुखता से दिखाई देता है।इस अवसर पर उनके द्वारा कही गई पंक्ति— “वृंदावन में रहना है तो राधे-राधे कहना, हिंदुस्तान में रहना है तो राधे-राधे कहना” —श्रद्धालुओं के बीच विशेष रूप से चर्चित रहा और इसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी। इस संदेश ने धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को अभिव्यक्त किया।
 
तिलोई का राजपरिवार क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा रहा है। राजा मयंकेश्वर शरण सिंह अपनी पारिवारिक परंपराओं के निर्वहन के साथ राज भवन में जनसुनवाई की व्यवस्था के लिए भी जाने जाते हैं। स्थानीय स्तर पर जरूरतमंदों की सहायता, फरियादियों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए प्रयास करने की परंपरा राज भवन को क्षेत्र के लोगों से जोड़ती है।राज भवन में लोगों का आना-जाना केवल धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न समस्याओं और जरूरतों को लेकर भी लोग यहां पहुंचते हैं।
 
जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की शिकायतें सुनना और संबंधित मामलों में सहायता का प्रयास करना इस परंपरा का महत्वपूर्ण पक्ष माना जाता है।राजा मयंकेश्वर शरण सिंह प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री के दायित्व का निर्वहन करने के साथ क्षेत्रीय विकास, सामाजिक सरोकारों और सनातन संस्कृति से जुड़े विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए भी जाने जाते हैं। धार्मिक आयोजनों में उनकी सहभागिता और श्रद्धालुओं के प्रति आत्मीय व्यवहार राजपरिवार की परंपराओं को वर्तमान सामाजिक जीवन से जोड़ता है।
 
श्रीराम कथा में  पहुंचे  श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। तिलोई ब्लॉक प्रमुख मुन्ना सिंह और धर्मेश मिश्रा सहित राजा के सहयोगी व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वयं राज्य मंत्री एवं राजा मयंकेश्वर शरण सिंह ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उनसे आत्मीय संवाद किया। राज भवन में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में परंपरागत आतिथ्य और सामूहिक सहभागिता का वातावरण दिखाई दिया।आसपास के जनपदों से श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यह आयोजन क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया।
 
कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस बात को रेखांकित किया कि भारतीय समाज में रामकथा जैसी धार्मिक परंपराएं आज भी लोगों को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक स्तर पर जोड़ने का माध्यम बनी हुई हैं। तिलोई राज भवन में आयोजित अमृतमयी श्रीराम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में सामने आई। भगवान श्रीराम के आदर्शों के माध्यम से समाज में मर्यादा, सेवा, सद्भाव और कर्तव्यबोध का संदेश प्रसारित हुआ।
 
राजपरिवार की ऐतिहासिक परंपराओं, धार्मिक आस्था, श्रद्धालुओं के प्रति आतिथ्य और जनसेवा के प्रयासों के बीच आयोजित यह कथा तिलोई की सांस्कृतिक पहचान को भी रेखांकित किया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं की उपस्थिति और विभिन्न क्षेत्रों से गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक पहचान प्रदान की ।राज भवन तिलोई में गूंजी श्रीराम कथा की आध्यात्मिक स्वर लहरियां श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने की प्रेरणा दी। भक्ति और परंपरा के इस संगम में सनातन संस्कृति के संरक्षण, भारतीय मूल्यों के प्रसार और समाज को सकारात्मक दिशा देने का संदेश प्रमुखता से उभरा।

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