पहली बारिश में बह गया विकास

लाखों की सड़क बनी भ्रष्टाचार की निशानी!

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लखीमपुर-खीरी, फूलबेहड़। सांच को आंच नहीं"और "समय से बड़ा कोई न्यायाधीश नहीं होता" ये कहावतें उस समय चरितार्थ होती दिखीं, जब लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित ग्राम लौकिहा से इब्राहिमपुर संपर्क मार्ग पहली ही बरसात में जगह-जगह धंस गया। जिस सड़क को ग्रामीणों के लिए विकास की नई राह बताया गया था, वही अब खतरे का रास्ता बन चुकी है।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की घोर अनदेखी की गई। सड़क की डामर परत उखड़ गई, किनारे धंस गए और नीचे की मिट्टी खुलकर बाहर आ गई।
 
तस्वीरें इस बात की गवाही देती हैं कि निर्माण कार्य में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही हुई है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।चोर की दाढ़ी में तिनका","ऊँची दुकान, फीका पकवान", और हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और" जैसी कहावतें ग्रामीणों की जुबान पर हैं। उनका कहना है कि कागजों में सड़क मजबूत दिखाई गई, लेकिन हकीकत पहली बारिश में ही सामने आ गई।  स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन किसान, छात्र, एंबुलेंस, स्कूल वाहन और भारी वाहन गुजरते हैं।
 
सड़क धंसने से लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो, दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा सड़क का पुनर्निर्माण मानकों के अनुरूप कराया जाए।
 
कहावत है_ झूठ के पांव नहीं होते, और सच्चाई देर से सही लेकिन सामने जरूर आती है।" पहली ही बरसात ने सड़क निर्माण की असलियत उजागर कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता के टैक्स के लाखों रुपये की जवाबदेही तय होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जनता की निगाहें अब लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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