असम विश्वविद्यालय में 20 जुलाई से लैंगिक संवेदनशीलता व POSH अधिनियम पर सप्ताहव्यापी कार्यशाला।

असम विश्वविद्यालय में 20 से 25 जुलाई तक "जेंडर सेंसिटाइजेशन, POSH अधिनियम एवं महिला सशक्तिकरण" विषय पर सप्ताहव्यापी कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

श्रीभूमि संवाददाता स्वतंत्र प्रभात : 
 
असम विश्वविद्यालय में 20 से 25 जुलाई तक "जेंडर सेंसिटाइजेशन, POSH अधिनियम एवं महिला सशक्तिकरण" विषय पर सप्ताहव्यापी कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) तथा मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (MMTTC), असम विश्वविद्यालय चैप्टर द्वारा किया जा रहा है। कार्यशाला में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, प्रशासक और विषय-विशेषज्ञ भाग लेंगे।
 
कार्यशाला का उद्घाटन 20 जुलाई को प्रातः 10 बजे विश्वविद्यालय के बिपिन चंद्र पाल सेमिनार हॉल में होगा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत करेंगे, जबकि डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता मुख्य अतिथि होंगी। स्वागत भाषण आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्ष प्रो. करबी दत्ता चौधरी देंगी। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. प्रदोष किरण नाथ, एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. रमैया बालकृष्णन, उपनिदेशक प्रो. अजय कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।
 
कार्यशाला में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलसचिव प्रो. एम. डी. महताब आलम रिज़वी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मानबेन्द्र दत्ता चौधरी, कलकत्ता विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. शांता दत्ता डे, नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सेक्रेटेरियट ट्रेनिंग एंड मैनेजमेंट (ISTM) की संयुक्त निदेशक नमिता मलिक, जादवपुर विश्वविद्यालय की आईसीसी की बाह्य सदस्य डॉ. अनिंदिता बंद्योपाध्याय तम्टा, एनआईटी दुर्गापुर की आईसीसी अध्यक्ष प्रो. सीमा सरकार, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल तथा सेवानिवृत्त शिक्षाविद् प्रो. विनोद नौटियाल संसाधन विशेषज्ञ के रूप में अपने विचार साझा करेंगे।
 
आयोजकों की ओर से डॉ. सोभन कुमार बेदाज्ञा ने बताया कि कार्यशाला के दौरान लैंगिक संवेदनशीलता, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) अधिनियम, महिला अधिकार, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी से यह कार्यशाला जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित एवं समावेशी शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें