31 मार्च 2027 तक चुनाव स्थगित करने की मांग पर अंतरिम राहत से इंकार, 12 अगस्त को अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के चुनाव 31 मार्च 2027 तक टालने की मांग पर तत्काल अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है।

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स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के चुनाव 31 मार्च 2027 तक टालने की मांग पर तत्काल अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है।

शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता तथा याचिकाकर्ता सरदार गुरमीत सिंह शंटी ने न्यायालय के इस आदेश का स्वागत करते हुए इसे सिख संगत के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

गुरमीत सिंह शंटी ने कहा कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा अधिनियम, 1971 के अनुसार डीएसजीएमसी के चुनाव प्रत्येक चार वर्ष में कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद चुनाव कराने में हो रही देरी उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय ने दिल्ली सरकार तथा गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय से यह स्पष्ट करने को कहा है कि 24 फरवरी 2026 से अब तक चुनाव कराने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं और चुनाव संपन्न कराने की प्रस्तावित समय-सीमा क्या है।

शंटी ने कहा कि उनकी ओर से लगातार यह मुद्दा उठाया जाता रहा है कि डीएसजीएमसी चुनावों में अनावश्यक देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है। अब न्यायालय द्वारा सरकार से जवाब तलब किए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव प्रक्रिया में विलंब को गंभीरता से लिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि न्यायालय ने इस मामले को अग्रिम सूची के शीर्ष पाँच मामलों में शामिल किया है, जिससे इसकी गंभीरता का पता चलता है। साथ ही, अगली सुनवाई पर गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय के जिम्मेदार अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में हुई प्रगति और देरी के कारणों की जानकारी न्यायालय को दी जा सके।शंटी ने कहा कि दिल्ली की सिख संगत निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध चुनाव चाहती है तथा किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि न्यायालय के समक्ष यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिख समुदाय को समय पर अपना लोकतांत्रिक अधिकार मिले और डीएसजीएमसी के चुनाव शीघ्र संपन्न कराए जाएं।


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