45.70 करोड़ का बजट पास, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी बोर्ड बैठक

सभासदों ने पालिका प्रशासन को किया कठघरे में खड़ा 

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तिलहर, शाहजहांपुर। नगर पालिका परिषद की वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट बोर्ड बैठक गुरुवार को विकास योजनाओं से अधिक भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जवाबदेही के सवालों के कारण सुर्खियों में रही। करीब 45.70 करोड़ रुपये का बजट तो सर्वसम्मति से पारित हो गया, लेकिन बैठक के दौरान सभासदों ने पालिका प्रशासन पर एक के बाद एक गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे, संदिग्ध टेंडर, सूचना छिपाने और मनमानी कार्यशैली जैसे मुद्दों पर जमकर हंगामा हुआ।
 
चेयरमैन हाजरा बेगम और अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बजट प्रस्तुत करते हुए अधिकारियों ने नगर विकास, सड़क, नाला निर्माण, सफाई, वेतन और पेंशन को प्राथमिकता देने की बात कही। अधिकारियों के दावों के बीच ही सभासदों ने व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए। सभासद दिलीप कुमार सक्सेना (अक्कू) ने आरोप लगाया कि नगर पालिका की करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्तियों से जुड़े मुकदमों में पालिका का अधिवक्ता ही नगर हितों के विपरीत काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
 
सभासद सुशील कुमार सिंह ने वर्ष 2024 से लंबित सूचना न दिए जाने को पारदर्शिता पर सवाल बताते हुए कहा कि आखिर ऐसी कौन-सी जानकारी है जिसे दो वर्ष बाद भी छिपाया जा रहा है। उन्होंने 16 लाख रुपये के नाला सफाई टेंडर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जब मलबा हटाने का काम पालिका कर्मचारियों से कराया गया तो ठेकेदार को लाखों रुपये का भुगतान किस आधार पर किया गया। उन्होंने सरकारी कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच की मांग उठाई। मामला उस समय और गरमा गया जब चेयरमैन आवास पर कार्यरत बताए जा रहे 15 संविदा कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया। आरोप है कि स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल की गई, जिस पर सभासदों और पालिका प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।
 
बैठक में कई सभासदों ने नगर पालिका की जमीनों पर अवैध कब्जे न हटाने, जनप्रतिनिधियों की लगातार उपेक्षा, फोन तक न उठाने, बदहाल सड़कें, जलभराव और चरमराई सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन को घेरा। उनका कहना था कि नगर की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में विकास दिखाने में व्यस्त हैं।लगातार बढ़ते विरोध और आरोपों के बीच अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार ने सभी शिकायतों की जांच कराने और दोष पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद हंगामे के बीच ही 45.70 करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया गया।

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