युवा सृजन संवाद,द्वारा प्रयागराज का 'घर गोष्ठी'आयोजन
प्रयागराज की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'युवा सृजन संवाद' द्वारा 'घर गोष्ठी' कार्यक्रम का आयोजन आज किया गया।जिसमें कविता-पाठ एवं चर्चा का आयोजन किया गया
स्वतंत्र प्रभात।
ब्यूरो प्रयागराज।
प्रयागराज की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'युवा सृजन संवाद' द्वारा 'घर गोष्ठी' कार्यक्रम का आयोजन आज किया गया।जिसमें कविता-पाठ एवं चर्चा का आयोजन किया गया
.कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी संजय पाण्डेय द्वारा नैनी में स्थापित एवं संचालित पुस्तकालय के उद्घाटन के साथ हुई। इसमें युवा विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के अध्ययन की सुविधा उपलब्ध रहेगी.तत्पश्चात इसी क्रम में किताबों के ऊपर लिखी गई कुछ कविताओं का पाठ किया गया।जिसमें मनोज त्रिपाठी, सोमदेव, रिया, जगदीश और जया ने विभिन्न कवियों की कविताओं का पाठ किया.
चर्चा हेतु निर्धारित विषय 'समाज और साहित्य की परस्परता' पर बात करते हुए कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ प्रोफेसर संतोष भदौरिया ने कि साहित्य मात्र समाज का दर्पण नहीं, समाज का अभिन्न अंग है।
साहित्य हमेशा अपने समय से मुखातिब होता है और समाज को बहुत गहरे तक प्रभावित करता है। उन्होंने प्रेमचंद के गोदान का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे प्रेमचन्द केसम्पूर्ण साहित्य ने समाज को बदलाव के लिए प्रेरित किया. उन्होंने साहित्य से धीरोदात्त नायक की विदाई की और सामान्य जन को प्रतिष्ठित किया ।
मध्यकालीन सन्त काव्य से अनेक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की साहित्य ने हमेशा मनुष्य और मनुष्यता की बात की. समाज को अनेक रूढ़ियों और कट्टरताओं से मुक्ति का मार्ग दिखाया. उन्होंने बताया कि कालजयी साहित्य समाज में रचा -बसा होता है।सत्ता का प्रतिपक्ष रचना साहित्य का ज़रूरी और अनिवार्य कार्यभार होता है, अतः यह समाज को जगाने और उसके संघर्ष की भूमिका रचने का कार्य करता है। विषय को आगे बढ़ाते हुए मुख्य अतिथि प्रो महमूद काज़मी जी ने उर्दू कविता में ग़ज़ल के बहाने समाज के साथ साहित्य की संलग्नता के बारे में बताया। उन्होंने किशन चंदर, प्रेमचंद, मंटो की कहानियों का विश्लेषण करते हुए समाज से साहित्य के जुड़ाव के बारे में बताया। अध्यक्षीय बात रखते हुए असरार जी ने हिंदी और उर्दू की साझी विरासत के साथ साहित्य की सामाजिकता के बारे में अपनी बात रखी.अंत में सभी धन्यवाद ज्ञापन संजय पाण्डेय ने दिया।कार्यक्रम का कुशल संचालन रिया त्रिपाठी ने किया.
गोष्ठी में प्रमुख रुप से प्रवीण शेखर, रियाज़ खान, मनोज त्रिपाठी,डॉ.निधि सिंह , सांत्वना पाण्डेय, मनोरमा त्रिपाठी, डॉ. शमेनाज़ शेख,सत्यमोहन, शिबगत , मयंक धवन, शिल्पा धवन, रिया, सोम, जया, जगदीश, दीपक सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे ।
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